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सोमवार, 2 मई 2011

ब्लॉगिग , ब्लॉगर्स , पुरस्कार आयोजन , राजनीतिज्ञ , मीडियाकर्मी .....और कुछ कही अनकही .




अब तक कल के आयोजन पर इतना कुछ कहा सुना पढा जा चुका है कि कोई गुंजाईश बची नहीं है , लेकिन फ़िर भी एक ब्लॉगर होने के नाते , उस कार्यक्रम मे शिरकत करने के नाते और अब तक उस आयोजन में मुझे दिखी सकारात्मक बातों को ( हां बहुत ही अफ़सोस के साथ लिखना पड रहा है कि हिंदी ब्लॉगिंग में नकारात्मकता को जितनी तेज़ी से लोकप्रियता हासिल हो जाती है उसकी आधी गति से भी सकारात्मकता को प्रोत्साहन नहीं मिल पाता ) इस पोस्ट के जरिए यहां रख सकूं । पिछले दिनों मां के बाद अचानक पिताजी के देहावसान ने इतना आहत किया हुआ था कि मन में कोई उत्साह नहीं रह गया था यही कारण था कि कार्यक्रम से एक दिन पहले तक साथी ब्लॉगर्स द्वारा कार्यक्रम की उपस्थिति को लेकर मैं अपना संशय प्रकट करता रहा , किंतु रविंद्र प्रभात जी और अविनाश वाचस्पति जी द्वारा पिछले वर्ष देखे गए स्वपन .जिसे उन्होंने "परिकल्पना " नाम दिया था उसे साकार करने में कैसे उन्होंने दिन रात एक कर दिया था ये बखूबी समझ रहा था । चूंकि राजधानी दिल्ली में रहते हुए और दिनचर्या का एक बहुत बडा हिस्सा ब्लॉगिंग के नाम कर देने के कारण एक स्वाभाविक सी जिम्मेदारी ये भी लग रही थी कि कम से कम उन ब्लॉग मित्रों से जिंदगी में एक बार मिलने का , उन्हें कलेजे से लगा कर अपने भीतर महसूस करने का एक अवसर निश्चित रूप से गंवाने जैसा होगा वहां नहीं पहुंच पाना । सूचना मिल चुकी थी कि छत्तीसगढ से पूरी मंडली , पटना से ब्लॉगर साथियों का समूह इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए कूच कर चुके हैं , इसके अलावा जाने किस किस कोने से कौन कौन पहुंच रहा है ये भी उत्सुकता का विषय था । जहां तक कार्यक्रम की रूपरेखा और उसमें शामिल अतिथियों , आयोजन के दौरान प्रस्तावित कार्यक्रमों आदि की रूपरेखा तैयार करने की बात है तो  वो कार्यक्रम मूल रूप से एक प्रकाशन संस्था हिन्दी साहित्य सदन की पचासवीं सालगिरह के स्वर्णिम समारोह के साथ ही साझा किया जाना तय हुआ था । ऐसी क्यों किया गया , किसलिए किया गया ये सब आयोजनकर्ता ही बेहतर बता सकते हैं लेकिन फ़िर भी आसानी से इसे समझा तो जा ही सकता है कि वातानुकूलित हॉल में, बडी बडी हस्तियों , मीडिया , और साहित्य विभूतियों तथा मुख्यमंत्री स्तर के राजनीतिज्ञ द्वारा किसी ऐसे कार्यक्रम में ब्लॉगरों की न सिर्फ़ सहभागिता , बल्कि उनके सम्मान की व्यवस्था करना करवाना ही इसके पीछे उद्देश्य रहा होगा । सवाल उठाने वाले तो आसानी से कह सकते हैं कि जरूरत ही क्या थी . ब्लॉगरों का कार्यक्रम ब्लॉगर्स के बीच भी तो किया जा सकता था और तब फ़िर बडी आसानी से आयोजकों को निशाने पर लिया जाता कि हुंह क्या यही था वो परिकल्पना महोत्सव । खैर इस विषय पर आगे ..तो यही सोच कर मैंने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करना जरूरी समझा ।


मुख्य द्वार पर ही मुझे ममता की प्रतिमूर्ति सी संगीता स्वरूप जी अपने पतिदेव के साथ मिल गईं , बाल कटे होने के कारण मैं टोपी पहने था और एक बार फ़िर इस कदर अलग था कि शायद आप इसी बात से यकीन करें कि जिससे भी मिला मुझे बार बार अपना परिचय नाम बताकर देना पडा और मेरी बगल में बैठे पाबला जी भी बहुत समय बाद मुझे पहचान पाए । अंदर पहुंचे तो चार बज चुके थे और स्टेज पर जहां रविंद्र जी , अविनाश भाई तैयारी में लगे थे वहीं गिरीश बिल्लौरे जी और पदम सिंह जी वेबकास्टिंग की तैयारी में लगे थे । 

गिरीश बिल्लौरे वेबकास्ट की तैयारी में

स्टेज पर रविंद्र प्रभात जी के साथ जिन्होंने कमान संभाल रखी थी उनका परिचय बाद में हिंदी साहित्य सदन के सचिव श्री गिरिराज शरण अग्रवाल की सुपुत्री गीतिका गोयल के रूप में बाद में हुआ । छत्तीसगढ के ब्लॉगर मित्र अभी नहीं पहुंचे थे , अपनी आदत के मुताबिक मैं घूम घूम कर चेहरे पहचान कर और अंदाज़े से मिल रहा था , ज़ाकिर अली रज़नीश जी , सलिल जी , प्रमोद तांबट जी , गिरीश बिल्लौरे जी , और जाने कितने ही ब्लॉगर मित्रों से मैं पहली बार मिल रहा था । इनके साथ ही जान पहचान वाले मित्र तो मिल ही रहे थे , हां नाम और पहचान जरूर मुझे सबको बतानी पड रही थी जिसका ज़िक्र मैं कर चुका हूं पहले ही ।



आगे की पंक्ति में सम्मानित अतिथि एवं प्रकाशन परिवार के सदस्य और ब्लॉगर मित्र भी बैठे हुए थे । समय बीत रहा था और मुख्य अतिथि रमेश पोखरयाल निशंक नहीं पहुंच सके थे कारण बताया गया कि मौसम और तेज़ हवाओं के कारण विमान के उतरने में विलंब हो रहा था । तब तक औपचारिक अनौपचारिक रूप से मंच संभाले हुए रविंद्र प्रभात जी ने हिंदी ब्लॉगिंग के कुछ पुराधाओं को अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया । सबसे पहले आमंत्रित किए गए श्री श्रीश शर्मा यानि ई पंडित जिन्होंने बडे ही धैर्यपूर्वक हिंदी ब्लॉगिंग के शुरूआती दिनों को याद करते हुए , अक्षरग्राम , नारद जैसे एग्रीगेटरों की चर्चा की और फ़िर ब्लॉग लिखने वाले विभिन्न प्लेटफ़ार्मों की भी जानकारी दी । इसके बाद श्री ज़ाकिर अली रजनीश जी ने विज्ञान को ब्लॉगिंग से जोडने और तस्लीम तथा साईंस ब्लॉगर्स एसोसिएशन की चर्चा करते हुए अपने सहयोगियों को धन्यवाद दिया । इसके बाद चौराहा ब्लॉग के पत्रकार ब्लॉगर और स्वाभिमान टाईम्स की संपादकीय टीम से जुडे हुए श्री चंडीदत्त शुक्ल जी ने बडी बेबाकी से ब्लॉग लेखन पर अपने विचार व्यक्त किए । इसके उपरांत विधि विशेषज्ञ ब्लॉअर श्री दिनेश राय द्विवेदी जी ने अपने विचार रखते हुए बताया कि ब्लॉग लेखन के लिए अलग से कोई कानून नहीं बने हैं और जो नियम कायदे कानून समाज में बोलने लिखने कहने पढने सुनने के बने हुए हैं वही सब ब्लॉग लेखन पर भी लागू होते हैं ।



श्री श्रीश शर्मा "ई पंडित "


श्री दिनेश राय द्विवेदी


अब धीरे धीरे घोषणा हो रही थी कि निशंक पधार चुके हैं ।




उनके आते ही पहले बारी बारी से उनका और उनके साथ उपस्थित अतिथियों का पुष्प एवं माल्यार्पण से स्वागत सत्कार किया गया । मां  सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ ही कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत हो चुकी थी समय हो चुका था छ : बजकर बीस मिनट , कार्यक्रम में पहले हिन्दी साहित्य सदन की अब तक की यात्रा, श्री गिरिराज शरण अग्रवाल उनकी पत्नी डा. मीना अग्रवाल दोनों पुत्रिया एवं अन्य सहयोगियों की अथक यात्रा के बारे में पावर प्वाईंट प्रेजेंटेशन के साथ साथ धन्यवाद देने का कार्यक्रम चलता रहा । इसके बाद बारी आई पुस्तकों के लोकार्पण की । 





अब तक पढी लिखी गई सभी रिपोर्टों में भाई बंधुओं ने सब कुछ लिखा सिवाय इसके कि हिंदी ब्लॉगिंग पर एक भारीभरकम और लगभग बहुत से सक्रिय ब्लॉगर के अनुभव , उनके आलेख , और उनके परिचय को समेटे हुए पुस्तक का लोकार्पण किया गया , इसके साथ ही जैसा कि तय था रविंद्र प्रभात जी द्वारा रचित ताकि बचा रहे लोकतंत्र और आदरणीय रश्मि प्रभा जी द्वारा संपादित त्रैमासिक पत्रिका वटवृक्ष का लोकार्पण किया गया ।



 

अब तक लिखी गई तमाम पोस्टों में मैंने कहीं भी इस बेमिसाल और अपने तरह की अनोखी पत्रिका जिसके सारे आलेख , कविताएं , कहानियां सब कुछ विशुद्ध रूप से ब्लॉग पोस्टें ही हैं । शायद ही किसी ने इस बात पर गौर फ़रमाया और ये सोचने की ज़हमत उठाई हो कि जब ये पत्रिका आम पाठक के हाथों में पहुंचेगी और वे लेखक के नाम के साथ उनके यूआरएल पते को पढेंगे तो उत्सुकता से ब्लॉंगिंग की दुनिया में जरूर झांकेगा और क्या ये कम बडी उपलब्धि है , ब्लॉगिंग का विस्तार हो , ब्लॉगिंग का विस्तार हो ..ये कहा तो खूब जाता है हर बार , लेकिन कैसे हो ? समाचार पत्र अगर ब्लॉग पोस्टों को उठाते हैं तो उस पर आपत्ति जबकि खुद नेट पर ही रोज जाने कितने ब्लॉग पोस्टों को चोरी से इधर उधर किया जा रहा है जो कहीं पकड में ही नहीं आती हैं या बहुत दिनों बाद नज़र में आती हैं , ब्लॉगर समाचार पत्रों को धमकाने तक की बात करते हैं लेकिन इस प्रश्न पर कि उन ब्लॉगों का क्या जो समाचार पत्रों की खबर को ही पोस्ट बना बना कर डाल रहे हैं , पर सबकी चुप्पी अखर जाती है खैर ये अलग पोस्ट का विषय है जिसपर कभी खुलकर और कुछ लिखूंगा ।


इसके बाद ब्लॉगर को पुरस्कार देने का कार्यक्रम शुरू हुआ , यहां ये बात भी कहता चलूं कि लगभग डेढ घंटे तक लगातार खडे रह रह कर जिस तरह से वयोवृद्ध साहित्यकार पंडित रामदरस मिश्र , अशोक चक्रधर , गिरीराज शरण अग्रवाल और मुख्यमंत्री निशंक ने एक एक ब्लॉगर को धैर्यपूर्वक पुरस्कार दिए , उनसे हाथा मिला कर शुभकामनाएं दीं |

निर्मला कपिला जी पुरस्कार लेते हुए 


रश्मि प्रभा जी पुरस्कार लेते हुए 


प्रमोद तांबट जी पुरस्कार लेते हुए 

श्री संजीव तिवारी जी पुरस्कार लेते हुए 
संगीता स्वरूप जी पुरस्कार लेते हुए 

रिजवाना कश्यम "शमा " जी पुरस्कार लेते हुए


 उस जज़्बे का जिक्र करना भी किसी को मुनासिब नहीं लगा , और शायद लगता भी कैसे खासकर उन्हें जो उस हॉल के बाहर खडे होकर कहानियां तलाश रहे थे , कार्यक्रम की कमियां ढूंढ रहे थे और उन साहित्यकारों से मिल रहे थे जो जाने कब से हिन्दी भवन के बाहर बैठे हैं मगर उनकी भी नज़र तभी पडी उनपर । साथे ही मीडिया मित्र मंडली से बाहर बाहर ही चर्चा करके रिपोर्ट लगाने के लिए या फ़िर कार्टून बना कर " असली बात " पहुंचाने में तत्परता से लगे थे । लेकिन अपनी उस रिपोर्ट को लगाते समय वे ये बात भी भूल गए कि रविंद्र प्रभात जी ने कार्यक्रम की शुरूआत मे ही भडास का जिक्र दुनिया के सबसे बडे हिंदी सामूहिक ब्लॉग के रूप में ज़िक्र किया था और पूरे फ़ख्र के साथ किया था , खैर । पुरस्कार वितरण करते करते इतना समय हो गया था कि सब या तो बाहर का रुख करने लगे थे या फ़िर किसी बहाने से टहलने लगे थे । इसके बाद मंच संचालिका ने अतिथियों से एक एक करके आग्रह किया कि वे आकर कुछ कहें । सबने अपने अपने विचार अपने अनुरूप रखे । यहां भी एक अच्छी बात ये देखने कि मिली कि ब्लॉगिंग और ब्लॉगर्स का ज़िक्र सबने किया , जिसका जितना ज्ञान था जिसका जितना परिचय था उसीके अनुरूप सबने इस बात को कहा । इसके उपरांत अल्पाहार के लिए सब फ़िर बाहर निकले और मैं तो निकल ही आया और घर के लिए चल दिया ।


ये तो थी एक ब्लॉगर की आंखों देखी रपट । अब कुछ जरूरी गैरजरूरी बातें । पिछले एक आध आयोजनों को देखते हुए ये अनुभव हो गया है कि अव्वल तो ब्लॉगर बैठक , मीट , सम्मेलन को बुलाए जाने का ख्याल जिनके भी मन में आ रहा हो वे फ़ौरन उसे चूल्हे में झोंक दें अन्यथा आपका श्रम , आपका धन , आपकी निष्ठा और सब कुछ सिर्फ़ एक पोस्ट से ही चौराहे पर लटका दिया जा सकता है और वैसे भी इन आयोजनों से कौन सा नोबेल पुरस्कार दिया जाना होता है । इसके बावजूद भी यदि विचार मन में कुलबुलाए ही तो फ़िर उसे विशुद्ध रूप से सिर्फ़ ब्लॉगर्स और ब्लॉगिंग के इर्द गिर्द ही रहना चाहिए । इस कार्यक्रम की रूपरेखा बनने में कोई भूल हुई हो या न हुई हो , लेकिन तय कार्यक्रम के अनुसार दूसरा भाग जो कि मीडिया विमर्श पर था उसे स्थगित कर दिया जाना और उससे भी ज्यादा मुख्य अतिथि तक को उपेक्षित सा महसूस हो जाना नि: संदेह ही दुखद और अफ़सोसजनक था जो कि नहीं होना चाहिए था कदापि नहीं । अगर किन्हीं कारणों से ऐसा हो रहा था तो कम से कम मुख्य अतिथि को विश्वास में लिया जाना चाहिए था और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराना चाहिए था । यहां साथी ब्लॉगर खुशदीप सहगल जी की विवशता और क्षुब्ध होने का कारण समझ में आता है कि जब मुख्य अतिथि उनके ही कहने पर आए थे और उनकी उपेक्षित सी भावना दिख रही हो तो मेजबान के रूप में उन्हें कैसा लगा होगा । इसलिए बेहतर होता कि पहले ही देर हो चुके कार्यक्रम में बदलाव की सूचना और घोषणा जल्दी से जल्दी न सिर्फ़ मंच से बल्कि उन अतिथियों और मुख्य अतिथि को देनी चाहिए थी , वे कार्यक्रम में रुके रहते या चले जाते , आते या नहीं आते ये उनका निर्णय होता । अब बात एक मुख्यमंत्री या कहें कि राजनीतिज्ञ के हाथों पुरस्कृत होने के विरोध की । क्या निशंक अचानक ही बिना बताए वहा टपक पडे थे ? क्या सचमुच ही किसी को नहीं पता था कि वे मुख्य अतिथि होने वाले हैं कार्यक्रम के , यदि पुरस्कारों को उनके हाथों से नहीं लिए जाने के पीछे हजारों तर्क दिए जा सकते हैं तो फ़िर किसी और के हाथों से लिए जाने के विरोध में फ़िर से हज़ारों तर्क दिए जा सकते हैं । खुद अमिताभ बच्चन भी आकर दें तो बडे ही आराम से विरोध ये कह कर किया जा सकता है कि हुंह ये कौन से हिंदी भाषा के ब्लॉगर हैं ?


हिंदी ब्लॉगिंग में कोई भी विवाद दो चार दिनों से ज्यादा नहीं टिकता , और इसे टिकना भी नहीं चाहिए । सबको पता है कि हम यहां सिर्फ़्र पढने लिखने आए हैं । अन्य सभी बातें , लोगों ने तो तरह तरह के कयास भी इस तरह के लगाए हैं कि पुरस्कारों के चयन में धांधलेबाजी हुई है , सेटिंग की गई है और जाने क्या क्या मानो पुरस्कार राशि करोड डेढ करोड हो या फ़िर कि इन पुरस्कारों के विजेताओं को रातोंरात पूरा विश्व पहचानने लगेगा कि सिर्फ़ यही हैं हिदी ब्लॉगिंग के पुरोधा । नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है इसलिए मुगालते में न रहें और ऐसा भी कतई न कहें कि बिना देखे परखे पुरस्कार बांट दिए गए । सबसे जरूरी बात ...किसी को सम्मानित करना कम से कम किसी को अपमानित करने से तो कहीं बेहतर है । चलिए इस बात का यहीं पटाक्षेप करता हूं , वर्ष २०११ की ब्लॉगिंग गाथा को जब भी याद किया जाएगा तो अलग अलग कारणों से ही सही इस समारोह को और इससे जुडी सभी घटनाओं पोस्टों और कही सुनी गई बातों को भी ध्यान में रखा जाएगा । 


46 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी रिपोर्ट, रोज़ आपको बज पर देखने के बावजूद न पहचान पाना वाकई शर्मिदा होने वाली बात थी। लेकिन मुलाकात के बाद ठीक से बात न हो पाना भी मुझे खला, कोई बात नहीं दोस्त, अगली बार कहीं........

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  2. बहुत ही सारगर्वित जानकारी दी है .... धन्यवाद

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  3. रविन्द्र प्रभात जी इस आयोजन के बाद अवकाश पर खूबसूरत वादियों में चले गए हैं। वे विश्लेषक हैं। उन्हें इस बीच में समय भी मिलेगा। वे स्वयं ही विश्लेषण करें इस आयोजन का तो बेहतर होगा।
    इस आयोजन में अविनाश जी और रविन्द्र प्रभात जी ने जो अथक श्रम किया है। उस का ब्लागरी के इतिहास में सानी नहीं है।
    लेकिन इस आयोजन में कुछ मूलभूत गलतियाँ भी हुई हैं। उन्हें चीन्हना आवश्यक है। ये गलतियाँ पहले भी हुई हैं। अफसोस यह है कि उन गलतियों से हम ब्लागरों ने कुछ सीखा नहीं और उन गलतियों को दोहरा रहे हैं।
    इस आयोजन की सब से बड़ी सफलता है कि आभासी माध्यम के कर्मकारों को यथार्थ में आपस में मिलने का अवसर मिला। यही हिन्दी ब्लागरी के लिए इस आयोजन से सब से बड़ी उपलब्धि है।

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  4. बहुत बढ़िया पोस्ट...आपने तस्वीर भी बहुत अच्छी खिचीं है ..तस्वीरें बोल रही है....और सबसे बड़ी बात ये की किसी को अपमानित करने से तो अच्छा है की किसी के अच्छे प्रयास को सम्मानित किया जाय...हमसब को इस आयोजन को इसी भावना से देखना चाहिए....शानदार पोस्ट...

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  5. आपकी हकारात्मक बातें मन को बहुत भा गई।

    धन्यवाद।

    प्यारे दोस्तों,

    अगर आप मूल रचनाकार हैं,तो आपके सृजनकी रक्षा के लिए, निम्न आलेख, मेरे ब्लॉग पर, आकर ज़रूर पढें ।

    कॉपीराइट एक्ट | HELPFUL HAND BOOK
    (प्रतिलिपि अधिकार अधिनियम)

    [url=http://mktvfilms.blogspot.com/2011/04/helpful-hand-book.html]कॉपीराइट एक्ट|HELPFUL HAND BOOK[/url]

    मार्कण्ड दवे।

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  6. अजय जी, बहुत-बहुत आभार इस बेहतरीन और विस्तृत रिपोर्ट के लिए.... ऐसा तो कोई आयोजन हो ही नहीं सकता है जिसमें कमियां ना हो. इसलिए बुराइयाँ ढूँढने की जगह अच्छाइयों की बात होनी चाहिए... गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मन्त्र कहलाता है.

    यहाँ एक बात और कहना चाहूँगा... ब्लॉग जगत में हर किसी को अपने हिसाब से सोचने और लिखने का हक है और यही इसकी ताकत है. इसलिए हर किसी को अपने अनुभव लिखने का भी हक है और मुझे तो उनको पढ़कर भी कोई परेशानी नहीं हुई. रही बात अविनाश जी और रविन्द्र प्रभात जी की मेहनत को तो कोई माने ना माने, वह तो उन्होंने ज़बरदस्त की, मानता हूँ कि थोड़ी कमियां रह गई, लेकिन वह कहाँ नहीं होती? उम्मीद है आगे से उन्हें भी ठीक कर लिया जाएगा.

    लेकिन कम से कम इस बहाने एक बेहतरीन शुरुआत तो हुई...

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  7. बढ़िया विस्तृत रिपोर्ट के लिए आभार अजय ! आयोजकों के लिए बधाई !

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  8. आयोजन पर पहली बेहतरीन विस्तृत पोस्ट !
    आभार !

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  9. अजय जी... आपकी पूरी चर्चा लाइव है और सबसे बड़ी बात की क्षणिक असुविधाओं में भी रोचकता भर दी है . तस्वीरें क्रम से बहुत अच्छी लगीं - शुक्रिया

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  10. जब कार्यक्रम पूर्व नियोजित था तो विरोध का प्रश्‍न नहीं उठना चाहिए था। यदि कार्यक्रम में कोई चूक हुई है तो वहीं समाप्‍त भी हो जानी चाहिए। किसी प्रकाशक के निजी कार्यक्रम में वे किसी राजनेता को महत्‍व दें या पत्रकार को, उनका निजी मामला है। यदि ये ही कार्यक्रम ब्‍लाग जगत की किसी पंजीकृत और अधिकृत संस्‍था द्वारा हुआ होता तो ह‍म उसके कमियां निकालने के हकदार हैं। अभी तो सारे ही ब्‍लागर निजी रूप से ही मिलजुल रहे हैं।

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  11. अजय जी,

    चित्र रिपोर्टिंग में हाल का कोई कोना और दृश्य छूटा नहीं है. रिपोर्ट सटीक प्रस्तुत की है. कहा तो ये जायेगा की मुर्गा जान से गया और खाने वाले को मजा नहीं आया. रवींद्र जी और अविनाश जी ने अथक परिश्रम किया और रही बात कमियों की तो वह तो कहाँ सम्पूर्ण रूप से कोई भी काम होता है. कहीं न कहीं तो कुछ छोट ही जाता है. आगे के लिए एक सबक बन जाती हैं हमारी ये कमियां और फिर निराकरण. कुल मिलाकर अपने ब्लोगर साथियों से मिलना सही रहा.

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  12. रविन्द्र प्रभात जी और अविनाश जी ने कुछ किया, ठीक लेकिन आगे और बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए.
    बधाई और शुभकामनाएं.

    बहरहाल और आखि़रकार , लेकिन इस बहाने एक शुरुआत तो हुई...

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  13. बहुत अच्छी रिपोर्ट
    तस्वीर बहुत अच्छी खिचीं है ..
    आयोजकों के लिए बधाई !बहुत-बहुत आभार अजय जी

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  14. priy ajay, sundar report ke liye badhai..'meetha' bhi aur 'kaduvaa' paksh bhi ujagar kiyaa. aise bade aayojano men kai baar aisaa ho jataa hai. janboojh kar naheen, baharhaal, bloging ke itihas men itana badaa aayojan pahale kabhi nahee huaa, isliye main aayojako ko dil se badhai doonga...main pahuch nahee payaa, is baat ka dukh hai.

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  15. बहुत दिनों से मेरे ब्लॉग पर नहीं आ रहे थे आप इसलिये मन संशय में था.माँ और पिताश्री के बारे में जानकर अत्यंत दुःख हुआ.मेरी उनको भावभीनी श्रद्धांजलि और हार्दिक नमन.आपको आयोजन में देख बहुत प्रसन्नता मिली.खुशदीप भाई की तबियत बहुत खराब थी ,इसलिये उनके साथ जल्दी लौटना पड़ा.आपने अति सुन्दर प्रस्तुति की है,इसके लिए बहुत बहुत आभार.

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  16. किसी भी सफ़ल आयोजन मे थोडी बहुत त्रुटियां रह जाती है तो उस ओर ध्यान ना देकर अपना काम तत्परता से करना चाहिये……………देखा जाय ्तो पूरा आयोजन सफ़ल रहा है और इस सबके लिये अविनाश जी और रविन्द्र जी बधाई के पात्र हैं।

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  17. एक सफल आयोजन की हार्दिक शुभ कामनाए --सुंदर पोस्ट ! कभी इन्ही आयोजनों में आप से मुलाक़ात होगी ...धन्यवाद !

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  18. बहुत बढ़िया रिपोर्ट... किसी भी तरह के आयोजन में श्रम और धन दोनों लगता है... सब लोग नहीं समझ पाते इसे...

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  19. Aapke mata-pita ke baare me padhke bahut afsos hua...unhen shraddhanjali arpit karti hun.
    Ye aaankon dekha haal bahut hee achhe tareeqese pesh kiya hai aapne.Sarv samaveshak tasveeren hain!

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  20. .किसी को सम्मानित करना कम से कम किसी को अपमानित करने से तो कहीं बेहतर है । ......मै आपसे सहमत हूँ |

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  21. अजय जी ,

    बहुत अच्छी और सार्थक रिपोर्ट ...कमियां निश्चय ही रहीं पर समय रहते उनको सुधार जा सकता था ...खैर जो बीत गयी सो बात गयी ...बहुत से ब्लोगर्स से मिलना हुआ ....और बहुत से छूट भी गए जो वहाँ उपस्थित थे ....इसका अफ़सोस रहेगा ...

    वैसे मैंने तुमको पहचान लिया था ..:):) नाम बताने की ज़रूरत नहीं पड़ी थी ..

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  22. अच्छी रिपोर्ट ... आपने बहुत मेहनत से इसे कवर किया है ... तस्वीरें भी लाजवाब अहीं ... शुक्रिया ...

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  23. कोई भी कार्यक्रम अपने आलोचक ढूँढ ही लेता है। लेकिन इससे लेशमात्र भी हताश होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। हम ब्लॉगर्स एक आभासी दुनिया का पर्दा हटाकर आमने-सामने बैठने की कोशिश कर रहे हैं तो इसमें बुराई क्या है?

    मैं भी ऐसी कथित बेवकूफ़ी कर चुका हूँ। लेकिन मौका मिले तो आगे भी करूंगा। :)

    जिन लोगों ने इसपर समय, श्रम और धन व्यय किया है उनके जज्बे को सलाम। अलबत्ता अपनी गलतियों से सीखने वाला ही सफलता की ऊँची सीढ़ियाँ चढ़ पाता है, इसलिए जो गलतियाँ इंगित की जाय उन्हें नोट कर लेना अच्छी बात है।

    निन्दक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय :)

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  24. समस्या वहां पैदा होती है जब हर कोई अपने एक मन अहम को ढोता फिरता है और एक दूसरे की खामियां ढूंढता है। कार्यक्रम में सहायक बने और आयोजकों की मेहनत को सराहें, यही बड़ी बात है। खामियां और गलतियां तो हर समारोह में हो ही जाती है॥ भूल-चूक माफ़ करें... बस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स:)

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  25. आलोचना तो होती रही हैं और होती रहेंगी.जो गलतियां हुईं अफसोसजनक थीं परन्तु उनसे ही से आगे सीख भी मिलेगी.
    यह प्रथम प्रयास तो और बहुत श्रम से किया गया.
    बहुत बहुत शुभकामनाये सफल आयोजन की.

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  26. आपसे जैसी उम्मीद थी, वैसी ही रिपोर्ट पाकर मन हर्षित हो गया.

    यह कितना सुखद है कि हिंदी ब्लॉगिंग में कोई भी विवाद दो चार दिनों से ज्यादा नहीं टिकता. बस, आने वाला समय और बेहतर हो. नये नये आयोजन प्रयोजन हों...विवादों और आलोचनाओं से आयोजन होना बंद होने लगते तो आज शायद लोग आयोजन की परिभाषा भूल चुके होते.


    अनेक शुभकामनाएँ एवं आयोजकों को बधाई.

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  27. आपकी रिपोर्ट का कल से बेसब्री से इंतजार था :)

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  28. बहुत दिनों से मन में तीव्र अभिलाषा थी कि बड़े लोगों के साथ बैठकर थोड़ी देर के लिए ही सही मैं भी बड़ा बन जाऊंगा,पर एक बेहद निजी आयोजन के चलते नहीं जा सका,जिसका अफ़सोस हमेशा रहेगा.
    अजय जी ,आपकी रपट ने भौतिक-अनुपस्थिति की कमी पूरी कर दी.बड़े ही सिलसिलेवार ढंग से आपने सारा आयोजन घोल के पिला दिया.रही बात कुछ चर्चाओं और विवादों की तो आजकल बड़े आयोजन होने के लिए यह सब ज़रूरी सा हो गया है.
    बहरहाल,सबने ब्लॉगर्स की चिंताओं और चिंतन को अपने नज़रिए से परखा,यही बड़ी उपलब्धि रही.
    एक बार फिर आपकी मेहनत को सलाम !

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  29. ये है एक सम्पूर्ण रिपोर्ट. अपने बहुत सी बातें साफ़ की हैं.

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  30. सफ़ल आयोजन के साथ साथ इत्ते सारे ब्लॉगर्स, मजा आ गया। सबको बधाई

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  31. चित्र ओर आयोजन का विवरण बहुत अच्छा लगा धन्यवाद

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  32. बहुत अच्छी रिपोर्ट...पढ़ कर मन आनंदित हो गया !
    शुभकामनाएँ !

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  33. अच्छी रिपोर्ट. मैं फिर वही बात दुहराऊंगा कि ब्लागर्स जो भी लिख रहे हैं, स्वान्त: सुखाय है, जिसे जो अच्छा लगे, करे. किन्तु यूं बिगाड़ करना उचित नहीं.
    शैशवकाल से गुजरता ये समय संक्रमणकाल जैसा प्रतीत हो रहा है.
    पुस्तक के बारे में रवि रतलामी जी ने काफी अच्छी जानकारी दी है. निस्संदेह इस पुस्तक पर बड़ी मेहनत की गयी है और निश्चित रूप से अच्छी होगी.
    श्रम दिवस की शुभकामनायें :) खुशदीप जी से उसी गुजारिश के सथ...

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  34. .
    बेहतरीन रिपोर्टिंग..
    इसे पढ़ कर ब्लॉगरों के चश्मे का नम्बर भी पता लगता है ।
    बधाई हो !

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  35. जहां आप हैं, वहां लगता है, हम भी हैं. सभी पुरस्‍कृतों को हार्दिक बधाई.

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  36. बहुत सारगर्भित समीक्षा..सफल आयोजन के लिये बधाई..

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  37. सजीव चित्रों के साथ निष्पक्ष तरीके से आपने इस दिन के घटनाक्रम को सभी के सम्मुख प्रस्तुत करने का ईमानदार प्रयास किया है । इसके लिये इस विशेष कार्यक्रम के आयोजनकर्ताओं विशेषतः श्री रविन्द्र प्रभातजी व अविनाशजी के साथ ही आप भी बधाई के हकदार हैं । गल्तियां दिखेंगी तो सुधरेंगी भी ।

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  38. मेरे लिए तमाम चीन्हें अनचीन्हें ब्लॉगर साथियों से मिलना ही इस अमारोह की सबसे बड़ी सफलता है...

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  39. श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

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  40. मुझे तो अभी तक यही पता नहीं चल पाया कि पुरस्कार राशि भी थी क्या कोई ? थी तो कितना ?(आपकी करोड़ डेढ़ करोड़ वाली बात प़र )..
    अजय भाई -एक अनुग्रह करेगें ?
    मेरी पुरस्कार राशि आयोजकों से भिजवाने को कहिएगा ..सम्मान में मेरी अब कोई रूचि नहीं रही !

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  41. श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

    श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी कल ही लगाये है. इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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