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मंगलवार, 30 जून 2009

राखी सावंत : हिंदी ब्लोग्गेर्स से नाराज और निराश



जी हाँ बिलकुल सच बात है ..सुना है...और आप तो जानते ही हैं मैं कभी झूठ सुनता हूँ भला..कसम पीपल वाले चमगादड़ की कई बार तो खुद चमगादड़ अपने सीक्रेट मुझसे शेयर करते हैं..कोई और सुन नहीं पाता न....खैर इस वाली काबिलियत की कहानी फिर कभी..तो जैसे ही मैंने ये सुना की राखी जी ..अपनी राखी जी..अरे वही देश की बेटी ..जिसने कलयुग में सतयुग का धर्म निभाते हुए स्वयाम्बर की परम्परा को दोबारा जीवित करने का सबसे बड़ा धार्मिक आवाहन किया है ..आज कल ब्लोग्गेर्स से ..वो भी हिंदी के ब्लोग्गेर्स से (वैसे हिंदी के ब्लोग्गेर्स से नाराज रहना एक बड़ा फैशन बनता जा रहा है ..और विद्वान्जानो का कहना है की ये बीमारी जल्दी ही न रुकी तो स्वाइन फ्लू का रूप ले सकती है ) खासी नाराज भी हैं और निराश भी..बस अपना नैतिक...भौतिक..आर्थिक..दैहिक...सात्विक..और भी जितने प्रकार के विक टाईप के कर्त्तव्य होते हैं...उन सभी के मद्देनज़र फ़ौरन से पेश्तर उनसे मुलाक़ात करने की सोची ....मगर हमारे सोचने से होता ..यदि सचमुच ही कुछ होता ..तो कमबख्त उस अनामी के लिए आजकल जितने पापड हमें बेलने पड़ रहे हैं....उसे कोई सी भी ..कोई सी भी ..स्वाइन फ्लू..मैड काऊ...दिमागी बुखार,, अरे छोडिये ..हैजा ही हो गया होता..न भी विदा होता तो थोड़े दिनों के लिए सही किसी डाक्टर के यहाँ तो बैठा होता...अरे चलिए इसे भी छोडिये.
.मिलने गए तो पता चला की उनसे अभी केवल वही मिल सकता है जो उनके लिए मछली ..घड़ियाल..गोद्जिला..एनाकोंडा..जो भी उन्होंने रखा होगा..उसकी अंक में तीर मारने के लिए उतावला होगा...हमने सोचा अजीब मुसीबत है भाई...दूसरा उपाय लगाया...देखिये हमने एक संगोष्ठी ( अरे जिसे आप लोग पार्टी कहते हैं न उसे हम ब्लोग्गेर्स संगोष्ठी कहते हैं ) का आयोजन किया है ..इसमें तो आ सकती हैं........नहीं नहीं जी पार्टी ....से जुडी कुछ विध्वंसकारी यादों के कारण वे इसमें या आपकी जो भी गोष्ठी..है वो ..उसमें नहीं आ सकती...अबे तो क्या नाराजगी कभी दूर ना होगी...कलयुग में ऐसी सतयुगी प्रवृत्ति नारी को यों दुखी छोड़ दें हम...अबे लानत है...और हम धक्का -मुक्की करके चल ही दिए मिलने...जैसे तैसे पहुँच ही गए...कमबख्त ये जैसे तैसे वाली प्रणाली तो हमारे जीवन का मूल मंत्र बन गैयी है...ब्लॉग्गिंग भी चल रही है..जैसे तैसे....

गे गे गे गे ....सामने से गुनगुनाती राखी चली आ रही थी..... हम हैरान...चकित ..अरे राखी जी आप भी ..तो फिर ये स्वयाम्बर ....अरे चुप रहो..तुम ब्लॉगर भी न बिलकुल टी वी वालों की तरह होते जा रहे हो ...पूरी बात सुनते ही नहीं....मैं तो गा रही थी...गे गे गे गे रे..गे रे सायबा......प्यार में सौदा नहीं....न मांगू सोना चांदी ..न मांगू हीरा मोती....अरे अपना पसंदीदा गीत...समझे......ओह हो.....अच्छा सुना है आप हिंदी ब्लोग्गेर्स से नाराज हैं........?

बस राखी जी आ गयी अपने सात्विक मूड में .........अरे छोडो...ये बात...तुम लोग पता नहीं क्या क्या बहस करते हो ....पता नहीं कौन कौन से मुद्दे पर चर्चा..करते हो.....और एक दुसरे को शाबाशी देते हो...तो क्या मैं ही बच गयी थी.....तुमने फिर एक नारी की अवहेलना की है........ये कोई आम पहल नहीं है......इत्ते सारे लोगों में से स्वयाम्बर करके ...एक जने को ...सिर्फ एक जने को चुनना ...कोई हेल्प लाइन नहीं..कोई एस एम् एस भी नहीं....इस बात की कहीं कोई चर्चा नहीं...और तो और ताऊ जी ने भी ..अरे राज जी ने भी नहीं ..इस पर कोई पहेली नहीं पूछे.....जब तुम लोगों ने ही चर्चा नहीं की तो ...शुकल जी से क्या शिकायत करूँ की उन्होंने..चिटठा चर्चा में ..मेरी चर्चा की चर्चा नहीं की...मैं कोई ब्लॉगर तो हूँ नहीं की सीधे सीधे शिकायत कर दूं ...अनाम बन कर इसलिए नहीं किया ...क्यूंकि पता चला है की..कोई जाल वाल ..कोई काँटा डाल रखा है ......बताओ भला आज इस देश में इससे बड़ा क्रांतिकारी कदम है और कोई महिलाओं के परिप्रेक्ष्य में .......मैंने न में मुण्डी हिलाई...जाओ जाओ मुझे अभी ..बहुत से टेस्ट लेने हैं...लड़कों के ....

चलते चलते...हिम्मत करके ..पूछ ही लिया...अच्छा राखी जी यदि आपको कोई भी लड़का पसंद नहीं आया तो ....

हें..हें..बेवकूफ हो क्या...अरे फिर स्वयाम्बर नंबर तू...स्वयाम्बर नंबर थ्री......और जब कुछ भी नहीं तो
गे..गे..गे..गे..गे........

गुरुवार, 25 जून 2009

मोबाईलीताइतिस


(मोबालीतातिस से पीड़ित एक व्यक्ति ) गूगल बाबा से साभार





ये किसी भी लिहाज से ये अच्छी बात नहीं है..एक तरफ इस सूअर फ्लू ने सबको चिंतित और परेशान कर रखा है..इसके बाद बारिश की दो बूँदें पड़ते ही ..डेंगू..मलेरिया..बुखार और पता नहीं क्या क्या ढेर सारी बीमारियाँ ..अपने यहाँ मेहमान बनके आने वाली हैं..मुई कभी ..इस घर में डेरा डालेंगे..तो कभी उस घर में.....

मगर इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात तो ये है की ..एक और बीमारी भी चुपके चुपके इन दिनों आपना पाँव पसार रही है....रही है क्या जी..लगभग आधी से ज्यादा नस्ल तो इसकी चपेट में आ भी चुकी है ....आपके ..हमारे..घर..बहार..सड़क पर ..सभी जगह इसकी मरीज आपको दिख जायेंगे....अरे मैं बताता हूँ ना इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लक्षण..बीमारी का नाम है ..मोबालीताईतिस ..जी हाँ बिलकुल ठीक सुना आपने..

घर से बाहर निकलते ही कई सारे ..बीमार लोग..एक हाथ से या फिर दोनों हाथों से ..मोटरसायकल..कार..अजी अब तो बस, ट्रक..यहाँ तक रिक्शा भी चलाते हुए ....एक तरफ को गर्दन झुकी हुई ..कान और कंधे के बीच दुनिया की सबसे जरूरी वास्तु को टिकाये हुए ..चले जा रहे होते हैं..किसी की कोई फिक्र नहीं होती ...इस नश्वर संसार की सारी चिंताओं से मुक्त ..उनका सारा ध्यान उस देव वाणी की तरफ होता है जो उनके उस यन्त्र (अजी मोबाईल ) से निकल कर आ रही होती है...इस बीमारी के परिणामों की क्या बात कहें....उनका खुद का तो जो होता है ...वो होता ही है...यदि गलती से भी इन मरीजों के सामने ...कोई स्वस्थ इंसान पड़ जाए .....तो बस ..उसका बंटाधार तय है....वैज्ञानिक जो इस बीमारी के इलाज के लिए शोध रत हैं....बताते हैं की..इस बीमारी से बचने के लिए उन्होंने कई यन्त्र आविष्कार किये...जिन्हें हैंड्स फ्री कहते हैं....मगर क्या किया जाए ..कमबख्त मरीज मानते ही नहीं..कहते हैं इस बीमारी में उन्हें मजा आने लगा है...कहते हैं आदत पड़ गयी है...मुआ मोबाईल न हुआ ड्रग्स हो गया जैसे......

तो अब आपको जहां भी ये मरीज दिखें....उन्हें दूर से प्रणाम करके पतली गली हो लें..और दूर जाकर प्रार्थना करें..उनके लिए ...क्यूंकि देर सवेर.....उन्हें इस नश्वर संसार से मुक्ति....नारायण नारायण....वाह गोया ये पोस्ट न हुई हितोपदेश हो गया....

सोमवार, 22 जून 2009

बाँकी बचे जो सपने थे ......


मैंने तो पहले ही कहा था की ....नींद अभी बांकी है मेरे दोस्त....और सपने भी..तो झेलिये...अगले सपनो को ...........

बहुत बड़ा ब्लॉगर सम्मलेन हुआ :- मैंने देखा की एक बहुत बड़े ब्लॉगर सम्मलेन का आयोजन किया गया है..अजी नहीं कौन स्पोन्सर करेगा.....ऐड सेंस वाले भी नहीं ..उन्होंने कहा हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन..नोंसेंस....हमने कहा ..अबे बेवकूफों तुम्हारे ऐडसेंस से जब हमने नाता नहीं जोड़ा तो ..तुम्हारे स्पोसर्शिप का इन्तजार करेंगे...बस आदेश हुआ की अपने अपने घरों से जो भी खाने को है पोटली में बाँध लाओ...और जुट गए सब..जगह तो ठीक ठीक याद नहीं..ताऊ को कहा है ..किसी दिन पहली में ही सबसे पूछ लो...कौन सी जगह थी......?
अजी सम्मेल्लन क्या था..मेला था..एक से एक ..ब्लॉगर जुटे...कोई धर्म नहीं..कोई जाती नहीं..और तो और देश परदेश भी नहीं..सिर्फ एक ही पहचान..ब्लॉगर हैं भैया..हर कोई एक दुसरे को हुलस कर गले लगा रहा है..और हमने तो पता नहीं कितनो का चरणस्पर्श करके आर्शीवाद लिया..लग रहा था जन्म सार्थक हो गया....सबसे मजेदार तो ये था की हर कोई एक दुसरे से ऐसे मिल रहा था मानो किसी बड़े सेलीब्रिटी से मिल रहा हो..अजी क्या खाने पीने का दौर चला ..और फिर बातचीत हुई..अजी उसका की सुनाएं..बस इतना जान लीजिये की बहुत जल्दी ही ..ई मंच सबको अपनी और खींचने वाला है...

स्वप्नफल :- चिट्ठासिंग सुनते ही बोले ,,बहुत बढिया भैय्ये.....मतबल बीजेपी चली गयी तो कोई गम नहीं ..एक बड़ी पार्टी और बनने वाली है....यार ये वाला सपना बड़ा अच्छा लगा.....भगवान् करे तेरा ये सपना सच हो जाये....देख यदि ऐसा होता है कभी तो मुझे जरूर बुलाना ...

चिट्ठाचर्चा में हुई ऐसी चर्चा.....:-अगला सपना देखा की चिट्ठाचर्चा में खूब जोरदार चर्चा हो रही है...अरे वैसी जोरदार नहीं..वो तो जोभी दमदार पोस्ट होती है...उसकी चर्चा तो होती है ..मगर इस बार मैंने देखा की उनकी चर्चा हो रही है जिन्हें पढ़ नहीं पाया सब चर्चा के जरिये उन पोस्टों पर पहुँच रहे हैं...नए ने ब्लोग्स की अद्भुत जानकारी मिल रही है....लग रहा है की बिलकुल फुर्सत में चर्चा की गयी है.........

स्वप्न फल :- अब इसका क्या कहूँ ...अबे भैया इसमें कौन बड़ी बात है.....अरे भैया ..ई काम तो तुम भी कर सकत हो......काहे नहीं चर्चा करते ..ऐसन ....

सम्मेल्लन के ऊपर महा सम्मेल्लन :- अरे चिट्ठासिंग यार..वो सम्मेल्लन वाला सपना अभी अभी आया ही था की ऊपर से एक और सपना तो गया ..अन्दर घुसा तो देखा पूछा ...सबने कहा ये भी ब्लोग्गेर्स का ही सम्मेल्लन है ..मगर उनका जो ....अनाम हैं..अनोनोमस ब्लोग्गेर्स...अब संख्या देख कर तुम ही बताओ . है ना महा सम्मेल्लन......मैं हैरान परेशान..देखा की कई तो ऐसे थे की जिनका नाम मैंने पहले भी पढा था ..चेहरा भी देखा था..मगर यहाँ अनाम सम्मेल्लन में...मेरी समझ में कुछ आता ..इससे पहले ही किसी ने पूछा ..तुम कौन हो..अरे तुम्हारा तो नाम है...पकडो मारो इसे....

मैं हडबडा कर उठ बैठा......चिट्ठासिंग कुछ स्वप्नफल बताता ..इससे पहले मैं ही कह उठा ..रहने दे ..यार अब इसका फल तो मैं भी समझ सकता हूँ....

रविवार, 14 जून 2009

स्वप्नलोक (विवेक भाई ) की वापसी :सपने फिर आने लगे





इस ब्लॉग्गिंग का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव अब तो जीवन पर पड़ने ही लगा है..ये बात तो कब की प्रमाणित हो गयी है....लीजिये एक और घटना आपके सामने पेश है..कल सुबह सुबह ही पता चल गया की विवेक भाई की वापसी हो गयी है..मतलब उनके साथ साथ स्वप्न लोक में घूमने का मौका भी दोबारा मिलने लगेगा...पूरे दिन यही बात पहले पन्ने पर टंगी रही ...बस घुस गयी दिमाग में....आप यकीन करेंगे...पूरी रात न जाने कैसे कैसे और कितने सपने आ गए...जितने याद है .बताता हूँ...मगर आपको बताने से पहले चिटठा सिंग को भी सुनाये थे सारे सपने...उनके स्वप्न फल के साथ सुनाता हूँ..




उड़नतश्तरी फौलो कर रही है :- मैंने पहला सपना देखा ...(जब भी ब्लॉग जगत से सम्बंधित कोई ..कुछ भी देखता..सुनता...लिखता हूँ..पता नहीं कैसे उड़नतश्तरी की एंट्री हो ही जाती है ) की अनजान ...गोलमगोल सी गुदगुदाती सी प्रानीनुमा वास्तु मुझे और मेरे चिट्ठे को फौलो करने लगी है..पहले तो मैं डर गया ....फिर खुश हुआ की अरे इंसानों की छोडो ....एक एलियन मुझे फौलो कर रही है....क्या एक्सक्लूसिव खबर है....मैंने इस खबर को और भी एक्सक्लुसिव बनाने के लिए ...सोचा की क्यूँ न मैं ही उड़नतश्तरी को फौलो करने लगूँ ...मगर ये भला कहाँ संभव था ...कहीं कोई जुगाड़ ही नहीं मिला...कुछ और देखता..सपने में कॉमर्शियल ब्रेक आ गया ..

जब चिटठा सिंग जी से
स्वप्न फल पूछा तो जवाब मिला ....बेटा तेरा कुछ नहीं हो सकता तुझे तो उड़नतश्तरी से प्यार हो गया है...जल्दी से वीजा बनवा ले ..कनाडे जाने का योग बन रहा है...वहीं फौलो शौलो करियो उन्हें ...

2.
गोलू पांडे और राम प्यारी का रिश्ता तय हो गया है :- दूसरा सपना साहित्यिक था...गोलू पांडे(लीजिये गोलू पाण्डे को नहीं जानते ,,ये श्वान कुमार ज्ञान जी के यहाँ के निवासी हैं ) ने अभी हाल ही में साहित्य चबाया था और साहित्य का स्वाद उनके मन को काफी भाया ..इसे बीच खबर मिली थी की राम प्यारी (अरे वही ताऊ की प्यारी और कुंवारी बिल्लन ) ने भी रामायण महाभारत पढना शुरू कर दिया है ...कमबख्त उनमें से ही पहेलियाँ भी पूछ रही है , सो यही पढ़ कर सोया ..देखा की मुझे उन दोनों का पवित्र रिश्ता करवाने की जिम्मेदारी दी जा रही है ताकि उसके भी सात फेरे हो सकें..

स्वप्न फल :- बेटा रिश्ता तय नहीं होने की स्थिति में ..गोलू पाण्डे जी के काटने के उपरांत लगने वाले चौदह इंजेक्शन...अभी खरीद कर रख लो....और हाँ दूकान पर ये भी पूछ लेना की बिल्ली पंजा मारे तो क्या दवाई खानी होती है ?

३.
तीसरा सपना .... आशीष भाई से इस मसले पर बातचीत चल रही थी की ताऊ की पहेलियों को हल करने के लिए ..बिल्लन को मछली खिला कर ...क्यूँ न उनकी एल्बम फोटू वाली पार कर ली जाए...तो हर हफ्ते ताऊ के ताऊ ही बने रहेंगे ....यही सोचते सोचते सोया ...देखा की आशीष भाई ने चुपके चुपके एक ऐसा गजेट कर लिया है की जिस से अनाम तिप्प्न्निकारों की पहचान ...सामने आ जायेगी ..मैं तो उछल पड़ा...नीचे पहुँच गया......

स्वप्न फल :- तू तो बेटा ब्लॉग्गिंग का विश्व युद्ध करवाने पर तुल गया है....जल्दी ही हिंदी ब्लॉग्गिंग का स्तर .... .अंतर्राष्ट्रीय होने वाला है...इतनी थूकम फाजीहत होगी की हिंदी ब्लॉग्गिंग पूरे विश्व में प्रसिद्द हो जायेगी ..और कुछ सफ़ेद प्सोशों का नाम भी खुल सकता है...

4. चौथा सपना ...मैंने देखा की मैंने भी एक पोस्ट ठेली ऐसी की द्विवेदी जी ने मुझे भी मेल किया ....मगर मैं क्यूँ मानता..मैं नहीं माना...कुछ दिनों बाद ...मुझे पर एक मुकदमा हुआ....चारों तरफ मेरे नाम की चर्चा हुई...मैं देश का पहला ऐसा ब्लॉगर नहीं शायद दूसरा या तीसरा ब्लॉगर बन गया....मगर हिंदी का पहला...जिसे अपनी पोस्ट के कारण सजा मिली...मेरा नाम और भी बढ़ गया...फिर मुझ पर और भी मुकदमें हुए ...जितना नाम होता गया..मुक़दमे बढ़ते गए...और मैं उस नाम के साथ जेल में बैठा ब्लॉग्गिंग कर रहा हूँ....मुहीम सफल हो रही है ...फ़ट्टे पर इजो जो चढ़े ..सब जेल जाने को उतावले हो रहे हैं..............

स्वप्न फल :- कब देखा था.....सुबह सुबह ...बेटा तू तो तैयारी कर ही ले फेमस होने की.......मगर हाँ सलाह न मान मर तूने सबका ..मान सम्मान बढा दिया है....

इअरे कहाँ चले .....
नींद अभी बांकी है मेरे दोस्त............और सपने भी.....

शुक्रवार, 12 जून 2009

बच्चे स्टार , तो माँ -बाप गिरफ्तार......


हाँ बिलकुल सच पढ़ा है आज छपी खबर के अनुसार इन दिनों तेजी से सभी कार्यक्रमों..सीरीयलों..तथा रीयलिटी शोज में बच्चों की भागीदारी के कारण बच्चों पर बढ़ते अनावश्यक बोझ के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने एक नया कानून लाने की योजना बनाई है जिसके तहत यदि किसी भी बच्चे को इन टी वी शोज में जरूरत से ज्यादा काम का सामना करना पड़ता है..या फिर की इन व्यावसायिक प्रतिबध्ह्ताओं के कारण उन बच्चों के बाल सुलभ बचपन जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है है तो ये न सिर्फ उन निर्माताओं-निर्देशकों पर भारी पडेगा बल्कि उन बच्चों के माता पिता को जेल की हवा भी खिला सकता है...

आज बच्चों का उपयोग ..विज्ञापनों..फिल्मों..टीवी सीरीयलों..यहाँ तक की बहुत बार तो कई विरोध प्रदर्शनों में किसी उत्पाद की तरह किया जा रहा है ..शायद ही कोई ऐसा मिनट बीतता हो जहां इन बच्चों को देखा और दिखाया na जा रहा हो...एक सर्वेक्षण के अनुसार ये प्रवृत्ति जहां एक तरफ बच्चों में समय से पहले ही एक अजीब तरह की परिपक्वता को जन्म दे रही है वही दूसरी तरफ अभिभावकों के मन में भी अपने बच्चों को इन रुपहले परदे पर चमकने की एक प्यास पैदा कर रहा है...ऐसा नहीं है की इन बच्चों की भागीदारी पर रोक लगाने से बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा या की उन पर से बहुत बड़ा कोई बोझ उतर जाएगा..मगर कानून लाने के पीछे मंशा ये है की यदि इस प्रवृत्ति को अभी नहीं रोका गया तो परिणाम अगली नस्ल के लिए विनाशकारी होंगे..दूसरा तर्क ये है की बच्चे जो भी कर रहे हैं उससे उनका शारीरिक और मानसिक लाभ क्या कितना हो रहा है ये तो पता नहीं magar उनके अभिभावक उनके जरिये मिलने वाले आर्थिक लाभ के लालच में जरूर पड़ गए हैं...

गौर तलब है की कानून की अनुशंषा करने वालों का कहना है की बच्चों को आधारित करके बनाए जाने वाले कार्यक्रमों में ऐसा कुछ नहीं होता जो कहा जाए की उससे बच्चों का कोई लाभ होने वाला है...पहले बच्चों को आधारित करके पहेली प्रतियोगिताओं या ऐसे ही कई छोटे मोटे खेल आदि पर आधारित बनाए जाते थे..मगर अब संगीत और नृत्य पर आधारित टैलेंट शोज में भीस्टर हमेशा कहीं उंचा रखा जाता है.. इससे अलग इसके पीछे ये भी एक तर्क है की इन शोज में नकारात्मक परिणाम का बच्चों के जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है....इस कानून का कितना और कैसा विरोध होता ये तो देखने वाली बात होगी ..साथ ही बच्चों के साथ चल रहे पचासों धारावाहिकों और पिक्चरों का भविष्य अब क्या होग ये भी..

मंगलवार, 9 जून 2009

किस किस के ब्लोग्स को पोलियो ड्रोप्स पीना है..हाथ उठाओ (पसंद न आने पर पोस्ट वापस, ऑफ़र सिमित समय तक )



आज जैसे ही महेंदर भाई ने याद दिलाया कि, सबको अपने स्वास्थय का ध्यान रखना चाहिए ..मेरा ध्यान बरबस ही इस खबर भी चला गया जिसमें रवि रतलामी जी ने आगाह किया है कि इन दिनों कंप्यूटर पर बहुत से जीवाणुओं और कीटाणुओं का हमला हो रहा ( यहाँ ध्यान दें कि मैंने कम्पूटर कहा है,,ईकिसी की पोस्ट पर आने वाली तिप्प्न्नियों को जीवाणु और कीटाणु समझते हैं तो ये आपकी समस्या है ) ..इसके अलावा भी कई लोगों ने शिकयात की है कि किसी के ब्लॉग पर तिप्प्न्नियाँ नहीं हो पा रही हैं तो किसी का ब्लॉग पन्ना ही नहीं खुल रहा है..ऐसी संक्रामक परिस्थितियों में मुझे स्वाभाविक रूप से ब्लॉग की सेहत की चिंता सताने लगी. हो भी क्यों न आखिर ब्लॉग भी तो एक तरह का आदमी ही है...(.मेरा मतलब इंसान है ) स्पष्टीकरण देना ठीक रहता है ..पता नहीं कौन सी महिला शक्ति आपके पीछे पड़ जाए...क्या कह रहे हैं आप ..एक बात बताइये ..ब्लॉग आपके साथ हंसता है रोता है..चलता है रुकता है..और तो और लड़ता है...कई बार आपके साथ दूसरों को गलियाता है...अब सिर्फ इस वजह से कि वो आपके लिए आपकी बीवी से झगडा नहीं करता आप उसे इंसान नहीं मानेंगे ...ये तो आपकी ज्यादती है.....तो भैया कुल मिला कर कहना ये है कि ब्लोगों की तबियत नासाज हो रही है.....

अरे चिंता क्यूँ करते हैं ...हमें कौन सा स्वाइन फ्लू से निपटना हा कि विश्व स्वास्थय संगठन की मदद लेनी पड़ेगी...यहाँ हैं डॉ साहब ....अरे नहीं मैं अनुराग जी कि या पूजा जी की बात नहीं कर रहा...मैं बात कर रहा हूँ डॉ आशीष खंडेलवाल की.. जो समय समय पर ब्लोग्स का इलाज करते रहते हैं ....उनके लिए अब तक न जाने कितने इंजेक्शन..कितने टीके ..और पता नहीं kitane ड्रोप्स का आविष्कार किया है..एक टीका तो आज ही उतारा है ...हमने तो अपने ब्लॉग को लगवा भी लिया है....तो इस समस्या को जब उनके सामने रखा गया ....तो उन्होंने काफी न नुकुर के बाद आखिरकार ब्लोग्स के लिए पुल्स पोस्लियो ड्रोप्स
बनाने की गुजारिश की तो वे मान गए......तो हे बीमार ब्लोग्स के अभिभावकों ..अपने अपने हाथ खड़े करें ...अन्यथा ....ब्लोग्स लंब लेट हो जायेंगे....

वैसे आशीष भाई का जिक्र चला है तो बताता चलूँ कि ...एक तो देर सवेर उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज होने वाला है क्यूंकि ..ब्लॉगजगत के सारे ब्लोग्गेर्स उनके फोल्लोवेर्स की लिस्ट में आ ही जायेंगे...और वे आजकल आनाम तिप्प्न्निकारों को ढूंढ ईनिकालने का कोई यन्त्र आविष्कार करने के जिस कार्य में लगे हुए हैं उससे तो उन्हें ब्लॉग्गिंग का नोबेल मिलना पक्का है.....खैर ये बाद की बात है ......(आप लोग उन्हें बताना मत कि मैंने ये खबर लीक कर दी है)

चलते चलते एक आखिरी बात......वो जो मैंने शीर्षक में लिखा था न ,,कि पोस्ट न पसंद आने की सूरत में वापस ले ली जायेगी...ऑफ़र सिमित समय तक ...सो भाई लोगों वो सिमित समय ये पढ़ते पढ़ते ख़त्म हो गया....वैसे भी अपने को पोस्ट वापस लेनी वेनी नहीं आती ........तो भैया जल्दी ही आशीष भाई ..ब्लॉग पल्स पोलियो डे की घोषणा करेंगे...तब तक ब्लॉग को ओ आर एस का घोल पिलायें....

रविवार, 7 जून 2009

बढ़ते दायरे : सकुचाते सम्बन्ध

बहुत पहले से मन में एक बात आ रही थी की जब से यहाँ दिल्ली में नौकरी में आया दायरा कितना बढ़ गया...नौकरी के सहकर्मी...तकरीबन हर साल बदलते मोहल्लों में आसपास रहने वाले परिवार ...उसके बाद जबसे इस इन्टरनेट की दुनिया में आया तो लगा की दुनिया ही छोटी हो गयी है.....पहले ब्लॉग्गिंग में....फिर किसी ने ऑरकुट ..किसी ने फेसबुक...किसी ने और कोई रास्ता दिखया...इस नयी दुनिया में एक से एक रिश्ता कायम हो गया....लगा की कितना अपनापन मिल रहा है ....कुछ अनजान दोस्तों के बीच...जिन्हें मैं शायद मैं अच्छे तरह क्या बिलकुल भी नहीं जानता , और वे ही कौन सा मुझे जानते हैं.....मगर लगता कहाँ है ऐसा....रोज तो उन्हें पढने और उनके बारे में कुछ लिखने की आदत सी हो गयी है...और तब एहसास ..और भी बढ़ गया की हाँ जो भी दायरा तो बढ़ ही गया है.....और कहूँ की बढ़ता ही जा रहा है .

मगर इससे अलग मुझे कभी कभी ये भी लगता है की क्या ये दायरे उन संबंधों को पाट सकेंगे .....जिन्हें मैं समय के गर्त में छोड़ आया .......कुछ तो समय के साथ साथ अपने आप छोट्टे चले गए.....मसलन स्कूल और कॉलेज के साथी बंधू...दोस्त ...जो धीरे धीरे मेरी तरह ही अपने जिन्दगी का मकसद और मुकाम तलाशते हुए कहीं दूर निकल कर ...कुछ दिनों बाद खो गए......कुछ सम्बन्ध मैं शायद इस दर के कारण जान बूझ कर छोड़ आया.....अरे नौकरी लग गई है....क्या पता किस दिन कोई काम निकलवा लें.....हलाँकि काम तो उनसे मेरा भी पड़. सकता था ...............मगर छोडो तब की तब सोची जायेगी.....पिछले बार ही जब गाँव गया था तो कितने काका दादा लोगों ने घेर लिए था ...अपने पोतों ..अपने भतीजों के लिए कुछ जुगाड़ करने को......मगर मैं कहाँ कर पाया था अब तक किसी के लिए भी कुछ....फिर ये सब मुझ जैसे लोगों से संभव भी तो नहीं था .......थोड़े ही दिनों में उन्हें समझ आ गया की मैं काम का आदमी नहीं हूँ ......सो वे भी किनारा कर गए.....मगर वे,hतो सम्बन्ध को हर हाल में निभाये रखना चाहते थे.....हुंह ...उनसे क्या सम्बन्ध रखता ...दकियानूसी कहीं के....हम अब कहाँ से कहाँ पहुँच चुके थे.....वे लगे थे अभी भी उन्ही देसी परम्पराओं को ढोने में .......

अब तो सब यही अपने हैं....देखा नहीं.....कितनी आत्मीयता से मिलते हैं....खुशी..गम...हसने..रोने ..सब में वैसे ही ...कोई बदलाव नहीं...ये भी डर नहीं की कुछ मांग लेंगे....ज्यादा से ज्यादा कभी आलोचना कर दी...मगर है तो सब के सब भले लोग......सोचता हूँ की दायरा बढ़ता ही जा रहा है ....मगर सम्बन्ध सारे सकुचा कर रह गए हैं...कुछ निचुड़ गए हैं....कुछ सूख कर टूट गए हैं.....

काश की इन बढ़ते दायरों के बीच संबंधों को सीचने के लिए भी थोड़ी सी जगह और जमीन बच्चा पाता.....चलो कोशिश करके देखता हूँ......

शुक्रवार, 5 जून 2009

ब्लॉग्गिंग में हीरो बनने के कुछ नुस्खे

जैसा की पिछले कई दिनों से देख रहा हूँ और आप भी तो झेल ही रहे हैं.....कमबख्त और दिमाग दोनों ही ब्लॉग्गिंग पर ही आकर अटक गए हैं .....और जो भी कुछ निकलता जा रहा है उसे आपके सामने जस का तस रख देता हूँ....और मुझे तो लग रहा है की इसमें आपको भी स्वाद आने लगा है....ठीक है अब आगे झेलिये...अज बात करते हैं की यदि फ़टाफ़ट आपको हीरो बनना है , अजी हिंदी ब्लॉग्गिंग में ..वर्ना टी वी और बोलीवुड में बनने के लिए तो टैलेंट हंट में भागमभाग करनी पड़ेगी ....मगर याहां बिलकुल आसान है....अरे नहीं नहीं कोई ताबीज नहीं है यार...कोई बलि वैगेरह भी नहीं देना है....बस कुछ ताजातरीन नुस्खे आजमाइए ...नतीजा आपके सामने होगा....और हाँ इन नुस्खों को पहले ही पेटेंट करा लिए गया है इसलिए दुबारा कराने का प्रयास न करें.... तो लीजिये पेश हैं जनाब वो अनोखे नुश्के जो आपको न सही आपके ब्लॉग को जरूर हिट करा सकते हैं.... १. एक पोस्ट उड़नतश्तरी पर लिखें :- हलाँकि मैं न भी कहूँ तो भी आप सबका मन कभी कभी न कभी तो ये kartaa ही होगा की जो रहस्यमयी गोलमगोल तिप्प्न्निकार आप सबके ब्लॉग पर प्रकट होता है...अच्छी अच्छी बातें कहता है...आपका उत्साह बढाता है उसके ऊपर कुछ न कुछ लिखा जाए....और फिर ज्यादा कोशिश भी नहीं करनी पड़ेगी....बस ये लिख सकते हैं की एक बड़े ही मुलायम से पृथिवी के आकार के अन्तरिक्ष के प्राणि जो की हमारे ब्लॉग पर प्रकट हो कर आर्शीवाद देते हैं उनका आभार पूरे हिंदी ब्लॉग जगत को करना चाहिए....आजकल ये ब्लॉगजगत में पूछी जा रही सभी पहेलियों का उत्तर बिलकुल सही सही दे देते हैं...यार ये सारी पहेलियों के उत्तर पहले ही गैस पेपर से पढ़ लेते हैं........शीर्षक में उड़नतश्तरी का नाम भर ले लेने से आपकी दस तिप्प्न्नियाँ.....(सिर्फ नाम लिख कर भी छोड़ दिया तो ).......पक्की हैं....मैं खुद सोच रहा हूँ हूँ की हफ्ते में एक पोस्ट तो उड़नतश्तरी पर लिख ही डालूं...ये क्यूँ न एक ब्लॉग ही उनके नाम पर शुरू कर दूं....नाम रख दूंगा...उड़न फटफटी... २.पहेलियाँ जरूर बूझें.....:- भाई आजकल ब्लॉग जगत में दो ही फार्मूले हिट हैं....या तो पहेली पूछें....या फिर पहेली बूझें....यदि दोनों काम कर सकें तो और भी उत्तम .....वैसे तो पहेली के दो ही हैड ओफ्फिस हैं......ताऊ जी की पहेली और रचना जी के ब्लॉगर पहचान......मगर सूना है अब इसकी कई ब्रांचें....और भी खुल गयी हैं......तो लगे रहिये ताक में कोई पहेली पूछे आप फट से घुस जाइए...जवाब दीजिये....अरे नहीं आता तो क्या हुआ....यही कह दीजिये ....नहीं आता...इसमें कौन सा ख़तरा है की गलत जवाब देने से आपके ब्लॉग्गिंग का लाईसेंस कोई छीन लेगा....समझ गए न.... ३. जब भी चिट्ठाचर्चा हो,,,पढिये और टिपियाइये.....:- जी हाँ ....इस फार्मूले के तो फायदे hee फायदे हैं.....एक तो बढिया ब्लोग्पोस्त एक ही जगह पर पढने को मिल जायेंगे......और उस पर प्रतिक्रया देने के भी बहुत लाभ हैं.....क्या पता किसी दिन आपकी कोई टिप्प्न्नी किसी चर्चाकार को अच्छी लगे ....और अगली चर्चा में आपका भी नाम हो.....क्या बात है....अभी से दिल में laddu footne लगे.... 4. अच्छी टिप्प्न्नी kariye....:- हाँ ...मुझे पता है..आपके लिए ये thodaa मुश्किल है....फिर आप इतने biji insaasan टिप्प्न्नी कैसे कर सकते हैं.....यार ainvein ही किसी की taareef किये जाओ ...सबके बस की बात थोड़े ही है....मगर pleeej pleej कोशिश तो kijiye न.....टिपियाइये और आपको भी लोग padhenge.......अरे ब्लॉग पोस्ट न सही तिप्प्न्नियाँ तो padhenge ही..... 5. अनुसरण करें...:- ये हीरो बनने की नई सेवा है.....हीरो न सही....सबके दोस्त तो आप बन ही जायेंगे....... अब सुपर हीरो बनने का एक और अकेला फार्मूला ....:- विवादित पोस्ट likhiye......इससे भी बात नहीं बन रही है तो ......फिर जाइए किसी भी ब्लॉग पोस्ट पार जाकर उसकी खूब आलोचना कीजिये.....भाषा अमर्यादित हो तो super हीरो बनने के चांस ज्यादा हैं.... और हाँ एक बात जो सबसे जरूरी थी वो तो मैं kehna ही भूल गया.....यदि आप सिर्फ ब्लॉग्गिंग पर लिख रहे हैं तो बांकी सारे फार्मूले भी फेल हैं.......देखिये न .....मैं खुद यही करने में लगा हूँ......... अब बस अब आगे ब्लॉग्गिंग पर .........नहीं......पता नहीं....अरे छोडो ....ब्लॉग्गिंग पर ...ही लिखूंगा....जब भी मौका मिलेगा....

बुधवार, 3 जून 2009

ब्लोग्वानी और चिट्ठाजगत के अलावा......


मैं पिछले कुछ दिनों से जब भी कोशिश कर रहा हूँ लिखने की स्वाभाविक रूप से या पता नहीं किन वजहों से सिर्फ ब्लॉग्गिंग पर ही कलम चल रही है.......और जब बातें चल ही रही हैं तो फिर जो एक बात काफी दिनों से मन में अटकी हुई थी सोचा कि आज आपके सामने रख दूं.....मुझे नहीं पता कि इसके पीछे मकसद क्या है और ये भी कि मैं दरअसल चाहता क्या हूँ...मगर दिल ने सोचा...कलम से शब्द निकले ....और जो कुछ निकल कर सामने आया........

वर्तमान में ज्यादातर ब्लोग्गेर्स किस भी ब्लॉग पोस्ट को पढने के लिए दों ही पन्ने खोलते हैं.....ब्लोग्वानी और चिट्ठाजगत.....इसमें कोई शक नहीं कि दोनों का ही अपना अलग स्वाद है....एक अलग अंदाज है...और अपनी अहमियत है.....कुल मिला कर दोनों ही लाजवाब हैं....अपने मिजाज और रूचि के अनुरूप आपको जो भी पसंद हो खोल कर शुरू हो जाइए......दोनों में ही लगातार सुधार और परिवर्तनों से उनका आकर्षण बरकरार रहता है...इसके अलावा जो भी अग्ग्रेगेतोर्स हैं......मुझे नहीं पता कि कितने हैं....मगर कुछ को तो मैं जानता हूँ और कभी कभी वहाँ पहुंचता भी हूँ .....लेकिन वे उतने लोकप्रिय और प्रचलित नहीं हैं....कारण मैं खुद नहीं जानता...यही वजह है कि मुझे अब लगता है कि इन दोनों ऐग्रेगेतार्स के अलावा और भी पन्ने होने चाइये....देखिये न दोनों ही प्रचलति पन्नो पर लगभग एक ही प्रणाली लागू होती है...थोड़े बहुत अंतर के साथ वही पोस्टें...वही पसंद ....और ज्यादा तिप्प्न्नियों वाली पोस्टों के रूप में सामग्री मौजूद रहती है....तो क्या अच्छा न हो यदि और भी कुछ पन्ने मैदान में आयें..जहां पहले पन्ने पर ..नए ब्लोग्गेर्स की पोस्टें.....अलग अलग विधाओं की पोस्टें...और एक साथ ज्यादा पोस्टें देखने को मिलें....
मुझे पता है...कुछ लोग कहेंगे.....लीजिये दों तो ठीक ठीक पूरा पूरा पढा नहीं जाता अब और आ तो उन्हें कौन पढेगा....मगर मुझे फिर भी लगता है कि और भी अग्रीगेतार्स हों तो अच्छा रहेगा...और अग्ग्रेगातार्स भी लगता है निश्चिंत से हो गए हैं...कोई नयी प्रतियोगिता नहीं....पहेली भी hamein ही पूछ कर बुझनी पड़ रही है.....हिंदी ब्लॉग्गिंग के सभी नए उपयोगी विजेटों को भी एक जगह दिखाने और लगाने की व्यवस्था हो....chaahe आशीष भाई की मदद ही क्यूँ न ली जाए....
एक आखिरी बात....आप में से जो भी अन्य अग्रीगेतार्स का पता जानते हों .....कृपया जरूर बताएँ ताकि और लोग भी जान सकें....मुझे तो बस हिंदी ब्लोग्स और नारद के बारे में पता है......

मंगलवार, 2 जून 2009

ब्लॉग्गिंग का भूत.....



अभी पिछले दिनों जब एक ब्लॉग पोस्ट पढी ...कि आईये भूत मारें....तो मैंने सोचा कि जूट तो सबने खूब मारे ...फिलहाल तो फुर्सत ही फुर्सत है..सो चलो यही सही...चलिए भूत मारें.....मगर भूत मारने के लिए भूत का होना भी तो जरूरी है.....यहाँ तो पडोसी तक नहीं मिलते ठीक से...रिश्तेदार और सम्बन्धी खुद हमें ही भूत समझते हैं...ऐसे में उनसे भी कोई उम्मीद बेकार थी......गाँव जाकर भूत पकड़ने की सोचने लगा...पता लगाया तो पता चला कि जब वहाँ आदमी ही नहीं रहे तो भूत भला अपना टाईम क्यूँ खोटी करेंगे गाँव में रह कर ....कहीं पढ़ा था कि ये भूत प्रेत विधेशों में भी कई देशों में पाए जाते हैं.....मगर यार वहां फेले ही बड़ी मार कुटाई चल रही है.....लोग मुझे ही मार मार कर भूत बना देंगे.....उफ़ क्या करूँ....परेशानी बढ़ती जा रही थी.....

मगर लानत है हम पर जो चीज सोच ली वो ढूंढे से न मिले ऐसा भला हो सकता है....घर में आँखें बंद कर अनुलोम विलोम करने लगे.......धीरे धीरे मन में दिव्या ज्ञान की प्राप्ति हुई ...अचानक ही एक दिव्यवानी...ऐसे प्रकट हुई जैसे उड़नतश्तरी किसी भी पोस्ट पर अवतरित हो जाती है......अरे मूर्ख तो जिस भूत को ढूंढ रहा है.... वो तो खुद तेरे पीछे पड़ा है...नालायक अब भी नहीं समझा ....ब्लॉग्गिंग का भूत.......तू खुद सोच ब्लॉग्गिंग किसी भूत की तरह तेरे पीछे नहीं पड़ा......मगर प्रभु मुझे तो कभी कभी इसके दौरे ही पड़ते हैं और मैं तो चाह कर भी अब तक नियमित नहीं हो पाया हूँ.....अबे तो क्या रोज लिखने से ही ऐसा होता है क्या...अच्छा अब मैं कुछ पूछने जा रहा हूँ तो सोच कर बता ..क्या ये सब सच नहीं है.......

अबे घामद जबसे तुने अपना कंप्यूटर लिया है..दिन रात इसी पर बैठा नहीं रहता...घर वालों से छुप कर ...बच्चों को किसी और काम में और बीवी को किसी सीरियल में बिजी करके तू नहीं लगा रहता इसी पर.....सोते जागते तेरे दिमाग में ब्लॉग्गिंग ही ब्लॉग्गिंग नहीं घोम्ती.....यही सोचता रहता है न.....कल क्या लिखना है......यार ये ताऊ ने अगली पहेली में क्या पूछा होगा...डॉ अनुराग के हॉस्टल में क्या हुआ होगा....द्विवेदी जी ने कौन सी कानूनी धारा पर लिखा होगा...डॉ पूजा अबकी बार दिल्ली की किन गलियों में घूमेंगी....महेंद्र भाई ने अबकी चिट्ठी चर्चा में तेरी चर्चा की होगी या नहीं...तू इसी चक्कर में तो उनके यहाँ पहुचंह कर खूब टिपियाता है बेटे...तुझे पता है कि फ़ुरसतिया जी को कभी भी इतनी फुर्सत तो होगी नहीं कि वो तेरा जिक्र करें...ब्लॉग टिप्स पर कौन सा नया गजेट आया होगा...नारी ने कौन सी नयी बहस शुरू की..भडास में कैसी भडास निकल रही है....अनिल अपने जहां से न जाने कौन सी बात कह रहा होगा....अविनाश भाई ,,मोहल्ले वाले की नै साईट पर क्या होने वाला है..दुसरे अविनाश भाई...तेताला गा रहे होंगे या कि बगीची में घूम रहे होंगे...सुना है ब्लोग्गेर्स मीत भी करने वाले हैं उसकी तैयारी में क्या क्या करूँ......अबे जा जा...तू नहीं सोचता अकी पाबला जी को अपनी वो कत्तिंग भेज दे जिसमें तेरे ब्लॉग पोस्ट छपे हैं समाचारपत्रों में....और तो और तू तो इसी में लगा रहता है कि यार कल उसके ब्लॉग पर टिप्प्न्नी नहीं कर पाया ...गया तो था...पढा भी मगर टिप्प्न्नी बक्सा नहीं खुल रहा था....शास्त्री जी कौन सी नै बहस शुरू करने वाले है....मीत जी आजकल कवाली सुनवा रहे हैं........अदालत पर ख्होब खबरें आ रही हैं ..मगर उस्कापन्ना थोडी देर से खुलता है...........दों दिनों से नए ब्लॉगर के ब्लॉग भी नहीं देखे....घोंचू तुझे इतना तो आता नहीं कि टिप्प्न्नी भी ठीक से हिंदी में कर सके ....मगर लम्बी लम्बी तिप्प्न्नियाँ मारता रहता है.........बेटा तू तो मारा जा रहा है कि हाय कोई तेरे ऊपर भी पहेली पूछे........

बस ...बस...बस करो भगवन...अब क्या पूरा चीर हर लोगे मुझ अबला का....अब इसमें मेरा क्या कुसूर.....ये भूत है कोई इंसान तो नहीं कि पीछा छुडा लूं.....और फिर ये जो आपने ऊपर मेरे ऊपर घोर लांछन लगाए हैं......प्रभु ये तो मुझ जैसे सभी बेचारे चाहते हैं.........आप जाइए ....मुझे कुछ नहीं पूछना आपसे...और कुछ सुनना भी नहीं है.......

मैं और मेरा भूत (ब्लॉग्गिंग का ) अक्सर ये बातें करते हैं..........

साथ चलने वाले

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