इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

गुरुवार, 25 जून 2009

मोबाईलीताइतिस


(मोबालीतातिस से पीड़ित एक व्यक्ति ) गूगल बाबा से साभार





ये किसी भी लिहाज से ये अच्छी बात नहीं है..एक तरफ इस सूअर फ्लू ने सबको चिंतित और परेशान कर रखा है..इसके बाद बारिश की दो बूँदें पड़ते ही ..डेंगू..मलेरिया..बुखार और पता नहीं क्या क्या ढेर सारी बीमारियाँ ..अपने यहाँ मेहमान बनके आने वाली हैं..मुई कभी ..इस घर में डेरा डालेंगे..तो कभी उस घर में.....

मगर इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात तो ये है की ..एक और बीमारी भी चुपके चुपके इन दिनों आपना पाँव पसार रही है....रही है क्या जी..लगभग आधी से ज्यादा नस्ल तो इसकी चपेट में आ भी चुकी है ....आपके ..हमारे..घर..बहार..सड़क पर ..सभी जगह इसकी मरीज आपको दिख जायेंगे....अरे मैं बताता हूँ ना इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लक्षण..बीमारी का नाम है ..मोबालीताईतिस ..जी हाँ बिलकुल ठीक सुना आपने..

घर से बाहर निकलते ही कई सारे ..बीमार लोग..एक हाथ से या फिर दोनों हाथों से ..मोटरसायकल..कार..अजी अब तो बस, ट्रक..यहाँ तक रिक्शा भी चलाते हुए ....एक तरफ को गर्दन झुकी हुई ..कान और कंधे के बीच दुनिया की सबसे जरूरी वास्तु को टिकाये हुए ..चले जा रहे होते हैं..किसी की कोई फिक्र नहीं होती ...इस नश्वर संसार की सारी चिंताओं से मुक्त ..उनका सारा ध्यान उस देव वाणी की तरफ होता है जो उनके उस यन्त्र (अजी मोबाईल ) से निकल कर आ रही होती है...इस बीमारी के परिणामों की क्या बात कहें....उनका खुद का तो जो होता है ...वो होता ही है...यदि गलती से भी इन मरीजों के सामने ...कोई स्वस्थ इंसान पड़ जाए .....तो बस ..उसका बंटाधार तय है....वैज्ञानिक जो इस बीमारी के इलाज के लिए शोध रत हैं....बताते हैं की..इस बीमारी से बचने के लिए उन्होंने कई यन्त्र आविष्कार किये...जिन्हें हैंड्स फ्री कहते हैं....मगर क्या किया जाए ..कमबख्त मरीज मानते ही नहीं..कहते हैं इस बीमारी में उन्हें मजा आने लगा है...कहते हैं आदत पड़ गयी है...मुआ मोबाईल न हुआ ड्रग्स हो गया जैसे......

तो अब आपको जहां भी ये मरीज दिखें....उन्हें दूर से प्रणाम करके पतली गली हो लें..और दूर जाकर प्रार्थना करें..उनके लिए ...क्यूंकि देर सवेर.....उन्हें इस नश्वर संसार से मुक्ति....नारायण नारायण....वाह गोया ये पोस्ट न हुई हितोपदेश हो गया....

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर् व्यंग्य। यहाँ तो ड्राइविंग के समय स्विच ऑफ ही इलाज है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर लिखा, लेकिन मुझे समझ नही आता कि लोग इतनी बात किस से ओर क्या करते है, फ़िर अगर जरुरी है तो हैंड्स फ्री ले ले, मेरे १५ € का कार्ड पुरे साल चलता है, ओर महीने मै एक दो बार ही कुछ पलो के लिये बात की.
    चलिये लगने दे बिमारी ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत खतरनाक बीमारी से मिलवा दिया. बच कर रहेंगे.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत खतरनाक बीमारी है यह, इसे रोकने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  5. राम बचाये इस बीमारी से. हमारे पास तो है ही नही तो काहे की चिंता?

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आजकल तो सब इसी से पीडि़त हैं ..!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सही....सचमुच इस रोग ने आधे से ज़्यादा लोगों को जकड रखा है.

    उत्तर देंहटाएं
  8. माफ़ करना भैया जी हमको भी इस रोग ने चपेट मे ले रखा है।बचने के कोई उपाय हो ज़रूर बताईयेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  9. श्रीअजयजी कुमार झा
    मोबालीताईतिस इस शब्द मे आपके व्यगात्मक लेख की पुरी छवि झलकती है। बहुत ही उपयोगी बाते कही है जनाब आपने।

    आभार/मगलकामना

    महावीर बी सेमलानी "भारती"
    मुम्बई टाईगर
    हे प्रभु यह तेरापन्थ

    उत्तर देंहटाएं
  10. मोबाइतोपदेश अच्‍छा है। इस प्रकार के चिंतनों के सूत्र समय समय पर ब्‍लॉगवासियों के लिए उपलब्‍ध करातें रहें। पर इस बीमारी से संपूर्ण मुक्ति व्‍यक्ति के अपने जमीर पर निर्भर है पर जमीर है कि जागता नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बिल्‍कुल सही कहा आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. ये तो कुछ भी नहीं यहाँ कई ब्लोग्र्ज़ को एक नया फ्लु हो गया है टिपिनाईटिस अब इसका क्या इलाज है? राम राम बच के रहना अजय भाइ

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपका ब्लॉग नित नई पोस्ट/ रचनाओं से सुवासित हो रहा है ..बधाई !!
    __________________________________
    आयें मेरे "शब्द सृजन की ओर" भी और कुछ कहें भी....

    उत्तर देंहटाएं
  14. ek insaan ko jeene ke lie kya chahiye?
    rotee ..kapda...makaan
    aur
    bas ek tho moblie

    उत्तर देंहटाएं
  15. kya kare! is beemari ko palna insaan ki majboori ho gaya hain......par han....gadi chalate waqt, road par ...... aur public places par jo drama chalta hain iski wajah se....kai baar disturbance ki wajah ban jata hain

    उत्तर देंहटाएं
  16. हा...हा...हा...हा...हा..हा..

    आपने बिलकुल सही कहा
    इस तरह के रोगियों की तादाद
    हद से ज्यादा बढ़ती जा रही है !

    सच बोलूं तो दो वर्ष पहले तक
    मैं स्वयं इस भयंकर बीमारी से ग्रसित था !
    लेकिन बाबा राम्देब की शरण में जाकर मेरा कल्याण हो गया !

    आज हालत यह है कि न के बराबर मोबाईल प्रयोग करता हूँ !
    एक मोटी रकम बचती है सो अलग !

    बधाई शानदार और महत्वपूर्ण आलेख के लिए

    आज की आवाज

    उत्तर देंहटाएं
  17. गजब का वर्णन किया है आपने। बधाई स्‍वीकारें।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

    उत्तर देंहटाएं

मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...