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गुरुवार, 2 जुलाई 2009



















आज का दिन भारत के सामाजिक..राजनितिक..विधिक..नैतिक..शारीरिक..भौतिक..दैहिक...प्रजातांत्रिक...व्यवहारिक...ऐतिहासिक ...इतिहास में (वाह क्या बात निकली है ,ऐतिहासिक..इतिहास )....यदि सबसे बड़ा ..नहीं तो ....अरे मगर सबसे बड़ा क्यूँ नहीं ..सबसे बड़ा ही है..ये दिन...आज न्यायपालिका ने भी सवा अरब की जनसंख्या वाली आबादी को कह दिया है की आप जो उस टाईप की आजादी मांग रहे थे..वो तो अब बिलकुल प्राकृतिक है..अरे प्राकृतिक क्या उससे भी ज्यादा....हाजेनिक और हर्बल है .....बल्कि अब तक सभी रिश्तों में सबसे पवित्र ...सभी तरह के मोह ...पाप...लोभ..काम ..से...मुक्त.....दो एक ही नस्ल के ...एक ही बनावट के...दो निश्छल प्राणियों के बीच ..बना रिश्ता है..तो भला हम क्यूँ नहीं मानेंगे..


और फिर हमें इस उपलब्धि पर भी तो गौर करना चाहिए की ..इस ऐतिहासिल निर्णय से हम अमरीका..जैसे बीस विकसित देशों की श्रेणी में आ गए हैं...अमा गरीबी अशिक्षा..बेरोजगारी ..में न सही ..इसमें तो कह ही सकते हैं की हम में और अमरीका में कोई फर्क नहीं है......तो आज जब पूरी दुनिया सो रही है तो आइये इस दुनिया को बता दें कि..आज फिर एक बार देश ने आजादी पा ली है...हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि इस महान कदम से हम जनसंख्या वृद्धि ...बलात्कार..सास बहु के झगडे..दहेज़ ह्त्या...आदि न जाने कैसे कैसे..और किस किस चीजों से मुक्ति पा लेंगे...और साहित्य में लैला- शीरी..मजनू फरहाद टाईप के प्रेम कहानियों के ग्रन्थ रचे जायेंगे.....उफ़ सोच के ही मन रोमांचित हुआ जाता है..

इसीलिए ये निर्णय किया गया है ..अरे मुझे बताया है कई ..जोडों ने भई...कि आज इस ऐतिहासिक दिन को राष्ट्रीय गे डे .....के रूप में मना कर ..उनको डेडीकेट किया जाएगा ..जो बेचारे अब तक तीन सौ सतहत्तर की मार झेल रहे थे ...उनके इस महान संघर्ष को भी युगों युगों युगों युगों तक याद किया जाएगा...

और इसका राष्ट्रीय गीत होगा...गे..गे..गे..गे........गे रे सायबा..... प्यार में सौदा नहीं......
बस ध्यान ये रहे कि , नर + नर हो, कोई मादा नहीं....

20 टिप्‍पणियां:

  1. जिन्हे मान है हिन्द पर वो कहां है कहां है....
    अब हमारा देश भी इस मामले मै अमीर देशो मे सब से अमीर हो जायेगा...आज हम जानवरो से भी गये गुजरे हो गये हैम सुयर भी सुयर के संग यह नही करता जो यह......
    लानत के सिवा मै कुछ नही कहुगां इ न लोगो को
    आप ने लेख बहुत सुंदर ढंग से लिखा
    धन्यवाद

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  2. ये दुनिया के बदलते रंग!!

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  3. हमारी समझ में तो किसी को परेशान होने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है !

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  4. आपका पोस्ट मुझे बेहद पसंद आया! इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए ढेर सारी बधाइयाँ! लिखते रहिये!

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  5. बदलता परिवेश है भाईया ..........और क्या कहे

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  6. समय के साथ सब कुछ बदलायमान् है बंधु.

    रामराम.

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  7. आखिर ये समाज किस दिशा में जा रहा है!!!!!!

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  8. इसका राष्ट्रीय गीत होगा...गे..गे..गे..गे........गे रे सायबा..... प्यार में सौदा नहीं......
    बस ध्यान ये रहे कि , नर + नर हो, कोई मादा नहीं....
    --------------------------
    यदि आप समय निकाल सकें तो समलैंगिकता पर कुछ हमने भी लिखा है, देखिएगा।

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  9. ajay ji ab kahna hi padega vaise maine kai blogo par is par lekh padhe aur bach kar nikal gaya mai un par kament karke un logo ko jo mansik roop se vikrat hai mahatv nahi dena chahta tha par aaj aap ke blog par padh kar man nahi maan raha to kuchh bhadas nikaal raha hun bhads aur anurodh bas itna hi hai ki in logo ka samarthan band karke khade hoo jaao inke khilaaf nahi to vo deen door nahi jab isityp ke aur logo ka group khada hoo gaye ga aur vo kahega ki unhe janvaro ke saath rahne ka kanun diya jaaye aur use kanuni manyta bhi di jaye tab ye apne aap ko animali,,st kahege aur vo bhi inka niji mamla hi hoga aur apne aap ko bhuddijivi kahne vaale ye tatpujiye log jo aaj inka samarthan karte hai kal unka bhi raag gala faad ke alapege vaise hi kun si kam vikrtiya hai bharat me jo yek aur mansik vikrti kaanun bana kar badhayi jaa rahai hai
    mitr ise antntr naa le
    saadar
    praveen pathik
    9971969084

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  10. Samay ka badlaav hai lekin kitna galat kitna sahi sabki vayktigat soch hai

    ek bahut achha lekh

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  11. आपके विचार पढकर यही कहने को है, " सबको सन्मति दे भगवान "
    - लावण्या

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  12. such hi bola apne....ameer desho ki nakal me ye hamara aitihaasik kadam hai.....

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  13. आगे आगे देखिये होता है क्या ...............

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  14. इसके (सु/कु)परिणाम कुछ महीनों बाद सामने आयेंगे.

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  15. arse baad is internet se dhang se ru-b-ru ho paya hoon,
    janaab kya-kya nahi likh diya aapne in dino, aur likhna to likhna gazab dha diya hai. huzoor vicharon me itne pankh laga dete hain aap to ki hum to jane kahaan se kahaan pahunch jate hain.
    baharhaal yu hi likhte rahiye taki humari udaan bhi barqarar rah sake.

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  16. badhiya vyang hai ajay ji. likhterahiyeham bhee aapkesaath hain

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  17. और उनका भजन होगा :
    "आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ"
    हा हा हा हा

    झा जी,
    अजी काहे के अमीर देश हैं ये,चरित्र, संस्कार से बिलकुल कंगाल हैं, सिर्फ पैसे से ही कोई अमीर नहीं हो जाता, चरित्र, संस्कार भी प्रभुत्वता की निशानी है, हर तीन साल में गाड़ी, घर और पत्नी बदल जाती है इनकी, वफादारी इनके शब्दकोष में है नहीं, फिर भी हम तो इन्हें ही अपना आदर्श मानेगे, क्योंकि इनकी त्वचा का रंग 'सफ़ेद' है स्वर्गदूत की तरह, जबकि इनकी सोच 'नर्कभूत' की है, बस घोर कलियुग आगया है और कुछ नहीं, जब सियार की मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है, और जब भारत को और रसातल में जाना होता है तो वो पश्चिम की नक़ल करता है......

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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