शुक्रवार, 14 मार्च 2008

एक कविता

दुश्वारियाँ अब,
तोड़ती नहीं,
अब तो,
दर्द से भी,
हम बेचैन नहीं होते॥

अक्सर ही,
फकाकशी ,
गले मिलती है, मुझसे,
साथ खड़े,
कभी मेरे,
सुख-चैन नहीं होते॥

पत्थर के,
इस जंगल में,
क्या बन चुका हूँ,
मैं भी पाषाण,
स्तब्ध मस्तिष्क,
मूक-बधिर मन,
गीले अब कभी,
ये नैन नहीं होते॥

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है.....

लादेन की मिस कॉल (व्यंग्य )

कल अचानक लादेन की मिस कॉल आ गयी। हाँ तो, आपको क्या लगता है की वो ससुरा अपना कॉल लगा कर मुझसे बात करेगा। नहीं जी, कहता है की मिस कॉल में कॉल ट्रेस करने का लफडा ज़रा कम रहता है। मैंने कहा की यार तू तो इतनी छोटी कॉल करता है की कई बार तो मैं भी ट्रेस नहीं कर पाटा, खैर। पलट कर मैंने भी फोन किया मगर अपने मोबाईल से थोड़ी , लोकल बूथ वाले सिक्के वाली कॉल से।

क्यों भाई लादेन , आज कैसे याद कर लिए, कहाँ हो, आज्ल्कल दिख्बे नहीं करते हो, ना टेप , न विडो न कोई बयान कोई धमकी भी नहीं का बात है सब ठीक है न , कहीं होली के मौसम में तबियात न न ख़राब कर बैठे हो।?

अरे का बतायें , हम त अपने टेंसन में हमको तो ई अमरीकवा वाला सब भी भूल-बिसर गया है। ससुरा सब लागल है अपना राष्ट्रपती के चुनाव में आ वाहून तालिबान , लादेन का कौनो चर्चा नहीं मुद्दा नहीं। ई एफ बी आई वाला सब भी हफ्ता में एक बार झूठ मूठ हमरे ख़बर हमरा पता के बारे में बोळ bओल कर हमको फैमस कर रहा था अब एक्दुमे चुप है।

लेकिन सुने थे की तुम तो पाकिस्तान में कहीं पर भाडा का घर में रह रहे हो ।

अरे छोड़ यार ई पाकिस्तान वाला बात, बता बेनजीर वाला इतना बडका काण्ड हुआ आ ऊ मुश्रफ्फ्वा कम से कम झूठ मूठ में ही सही हमरा नाम ले देता, पता नहीं कौन लल्लू पंजू गैंग का नाम ले लिया, अब त अपने लफडा में फंसा हुआ है, कह रहा था भैया हमरा यहाँ से रिटायर होने का टाईम आ रहा है , आका चेला बन जायेंगे।

लेकिन तुम्हरा भी तो गलती है तुम आज कल अपना टेप आ एल्बम वाला प्रोग्राम भी त नहीं pएश कर रहे हो।

यार ई में तो तुम लोग का टी वी वाला सब का बदमाशी है यार , एकदम धोखा धदी वाला बात है, अब कहता है की छोडो दादा , अब त तुम्हरा टेप से बढियां राखी सावंत का छोटा सा साक्षात्कार से हम लोग का टी आर पी बढ़ जाता है. अब त तुम्ही बताओ की का काम करें की कुछ त फैमस हो जाएँ पहले की तरह.

देखो भैया अब इतना कह रहो हो तो हमारी मनो तो तुम भी ब्लोग्गिंग शुरू कर दो , यार कम से कम हम लोग के बीच त फैमस हो ही जाओगे. और यदि तुमने अपनी बेगमों और बच्चों को pअसंद की घंटी बजाने के लिए कह दिया तो यकीन मानो यहाँ सब ब्लॉगर पिछड़ जायेंगे, सब का घंटी बज जायेगा, कहो का कहते हो.

अच्छा यार अगला बार मिस कॉल करेंगे त फ़िर बताना की ई सब कैसे होगा ?

लादेन की मिस कॉल (व्यंग्य )

कल अचानक लादेन की मिस कॉल आ गयी। हाँ तो, आपको क्या लगता है की वो ससुरा अपना कॉल लगा कर मुझसे बात करेगा। नहीं जी, कहता है की मिस कॉल में कॉल ट्रेस करने का लफडा ज़रा कम रहता है। मैंने कहा की यार तू तो इतनी छोटी कॉल करता है की कई बार तो मैं भी ट्रेस नहीं कर पाटा, खैर। पलट कर मैंने भी फोन किया मगर अपने मोबाईल से थोड़ी , लोकल बूथ वाले सिक्के वाली कॉल से।

क्यों भाई लादेन , आज कैसे याद कर लिए, कहाँ हो, आज्ल्कल दिख्बे नहीं करते हो, ना टेप , न विडो न कोई बयान कोई धमकी भी नहीं का बात है सब ठीक है न , कहीं होली के मौसम में तबियात न न ख़राब कर बैठे हो।?

अरे का बतायें , हम त अपने टेंसन में हमको तो ई अमरीकवा वाला सब भी भूल-बिसर गया है। ससुरा सब लागल है अपना राष्ट्रपती के चुनाव में आ वाहून तालिबान , लादेन का कौनो चर्चा नहीं मुद्दा नहीं। ई एफ बी आई वाला सब भी हफ्ता में एक बार झूठ मूठ हमरे ख़बर हमरा पता के बारे में बोळ bओल कर हमको फैमस कर रहा था अब एक्दुमे चुप है।

लेकिन सुने थे की तुम तो पाकिस्तान में कहीं पर भाडा का घर में रह रहे हो ।

अरे छोड़ यार ई पाकिस्तान वाला बात, बता बेनजीर वाला इतना बडका काण्ड हुआ आ ऊ मुश्रफ्फ्वा कम से कम झूठ मूठ में ही सही हमरा नाम ले देता, पता नहीं कौन लल्लू पंजू गैंग का नाम ले लिया, अब त अपने लफडा में फंसा हुआ है, कह रहा था भैया हमरा यहाँ से रिटायर होने का टाईम आ रहा है , आका चेला बन जायेंगे।

लेकिन तुम्हरा भी तो गलती है तुम आज कल अपना टेप आ एल्बम वाला प्रोग्राम भी त नहीं pएश कर रहे हो।

यार ई में तो तुम लोग का टी वी वाला सब का बदमाशी है यार , एकदम धोखा धदी वाला बात है, अब कहता है की छोडो दादा , अब त तुम्हरा टेप से बढियां राखी सावंत का छोटा सा साक्षात्कार से हम लोग का टी आर पी बढ़ जाता है. अब त तुम्ही बताओ की का काम करें की कुछ त फैमस हो जाएँ पहले की तरह.

देखो भैया अब इतना कह रहो हो तो हमारी मनो तो तुम भी ब्लोग्गिंग शुरू कर दो , यार कम से कम हम लोग के बीच त फैमस हो ही जाओगे. और यदि तुमने अपनी बेगमों और बच्चों को pअसंद की घंटी बजाने के लिए कह दिया तो यकीन मानो यहाँ सब ब्लॉगर पिछड़ जायेंगे, सब का घंटी बज जायेगा, कहो का कहते हो.

अच्छा यार अगला बार मिस कॉल करेंगे त फ़िर बताना की ई सब कैसे होगा ?

गुरुवार, 13 मार्च 2008

हम लोग गंदगी पसंद लोग हैं या कहूँ की सूअर हैं.

कल किसी मित्र को छोड़ने के लिए स्टेशन जाना पडा, यूं तो स्टेशन की भीड़ भाड़ में सिर्फ़ एक ही बात दिमाग में घूमती रहती है वो ये की किस तरह आप ख़ुद या की जिसके लिए आप वहाँ गए है वो सुरक्षित अपनी गाडी में बैठ जाएँ, किंतु चूँकि गाडी के प्लत्फोर्म पर आने में अभी वक्त था तो अनायास ही नज़र इधर उधर दौड़ने लगी, देखा तो चारों तरफ़ भांति भांति के कुदे और कचरे का अम्बार लगा था तिस पर लोगों ने अपने गुटखे पान के पीक की आधुनिक या पुरातन जो भी आप समझें चित्रकारी कर रखी थी । मेरा ध्यान इसलिए भी आज ज्यादा उस और जा रहा था क्योंकि कुछ देर पहले ही मैं समाचारों में देख पढ़ कर आ रहा था की दिल्ली सरकार ने आज ही ये फैसला लिया था की आने वाले कुछ महीनों में सड़कों पर या कहूँ की खुली जगह पर गंदगी फैलाने वालों पर , थूकने वालों पर , या मल मूत्र करने वालों को वहीं पकड़ कर जुर्माना और दण्डित किया जायेगा। मैं सोचने लगा की क्या ये पहली बार होगा, और क्या इससे कोई फर्क पडेगा, मुझे तो कम से कम ऐसा नहीं लगा। थोड़ी देर बाद पानी भरने के लिए मैं नलके के पास गया वहाँ एक सज्जन मेरे सामने ही उस नलके से पानी ले ले कर मुंह हाथ धोने के अलावा चेहरे और नाक कान गले की सारी सफाई करने लगे, मुझसे रहा नहीं गया और सिर्फ़ मेरे नाराज़ नज़रों को भांप कर फट से उन्होंने कहा, " भइया हिन्दुस्तान में पैदा हुए हो तो gअन्दगी में रहने की aआदत डाल लो " मैं हक्का बका ये सोच रहा था की हम क्या सचमुच गंदगी पसंद लोग बन गए है, या कहूँ की सूअर बन गए है।

एक छोटी सी कहानी आपको सुनाता हूँ । एक बार एक बहुत बड़ा सेठ मरने से पहले अपने चारों बेटों को बुलाता है और कहता है की बेटा मरने के लगभग पाँच वर्षों के बाद मैं अमुक आदमी के यहाँ सूअर के रूप में जन्म लूंगा और मेरे कान के नीचे एक काला दाग होगा , तुम चारों मुझे पहचान कर वहाँ से ले आना और मार देना ताकि पुनः अगला जन्म मैं किसी अच्छे रूप में ले सकूं। जैसा उस सेठ ने कहा था वैसा ही हुआ, लगभग पांच वर्षों बाद जब उसके चारों बेटे उस व्यक्ति के पास पहुंचे और उसे सारी बात बताई तो वह व्यक्ति चकित होकर बोला आप इन्हें ले जा सकते है, जैसे ही वे चारों अपने सूअर बने पिता के पास उसे ले जाने को पहुंचे उस सूअर ने कहा, बेटा मैं तुम चारों को पहचान गया और अपनी कही बात भी मुझे ध्यान है मगर अब मुझे यहीं रहने दो मुझे इस गंदगी की आदत हो गयी है ॥ चारों बेटे वापस लौट गए।

तो ये अब आपको और हमें सोचना है की क्या वाकई हम सूअर बनते जा रहे है, सरकार के नियम और क़ानून किसी भी व्यक्ति किसी भी समाज और किसी भी देश को एक दिशा तो दे सकते है परन्तु संस्कार और व्यवहार तो हमें ख़ुद ही बनाने होंगे.

हम लोग गंदगी पसंद लोग हैं या कहूँ की सूअर हैं.

कल किसी मित्र को छोड़ने के लिए स्टेशन जाना पडा, यूं तो स्टेशन की भीड़ भाड़ में सिर्फ़ एक ही बात दिमाग में घूमती रहती है वो ये की किस तरह आप ख़ुद या की जिसके लिए आप वहाँ गए है वो सुरक्षित अपनी गाडी में बैठ जाएँ, किंतु चूँकि गाडी के प्लत्फोर्म पर आने में अभी वक्त था तो अनायास ही नज़र इधर उधर दौड़ने लगी, देखा तो चारों तरफ़ भांति भांति के कुदे और कचरे का अम्बार लगा था तिस पर लोगों ने अपने गुटखे पान के पीक की आधुनिक या पुरातन जो भी आप समझें चित्रकारी कर रखी थी । मेरा ध्यान इसलिए भी आज ज्यादा उस और जा रहा था क्योंकि कुछ देर पहले ही मैं समाचारों में देख पढ़ कर आ रहा था की दिल्ली सरकार ने आज ही ये फैसला लिया था की आने वाले कुछ महीनों में सड़कों पर या कहूँ की खुली जगह पर गंदगी फैलाने वालों पर , थूकने वालों पर , या मल मूत्र करने वालों को वहीं पकड़ कर जुर्माना और दण्डित किया जायेगा। मैं सोचने लगा की क्या ये पहली बार होगा, और क्या इससे कोई फर्क पडेगा, मुझे तो कम से कम ऐसा नहीं लगा। थोड़ी देर बाद पानी भरने के लिए मैं नलके के पास गया वहाँ एक सज्जन मेरे सामने ही उस नलके से पानी ले ले कर मुंह हाथ धोने के अलावा चेहरे और नाक कान गले की सारी सफाई करने लगे, मुझसे रहा नहीं गया और सिर्फ़ मेरे नाराज़ नज़रों को भांप कर फट से उन्होंने कहा, " भइया हिन्दुस्तान में पैदा हुए हो तो gअन्दगी में रहने की aआदत डाल लो " मैं हक्का बका ये सोच रहा था की हम क्या सचमुच गंदगी पसंद लोग बन गए है, या कहूँ की सूअर बन गए है।

एक छोटी सी कहानी आपको सुनाता हूँ । एक बार एक बहुत बड़ा सेठ मरने से पहले अपने चारों बेटों को बुलाता है और कहता है की बेटा मरने के लगभग पाँच वर्षों के बाद मैं अमुक आदमी के यहाँ सूअर के रूप में जन्म लूंगा और मेरे कान के नीचे एक काला दाग होगा , तुम चारों मुझे पहचान कर वहाँ से ले आना और मार देना ताकि पुनः अगला जन्म मैं किसी अच्छे रूप में ले सकूं। जैसा उस सेठ ने कहा था वैसा ही हुआ, लगभग पांच वर्षों बाद जब उसके चारों बेटे उस व्यक्ति के पास पहुंचे और उसे सारी बात बताई तो वह व्यक्ति चकित होकर बोला आप इन्हें ले जा सकते है, जैसे ही वे चारों अपने सूअर बने पिता के पास उसे ले जाने को पहुंचे उस सूअर ने कहा, बेटा मैं तुम चारों को पहचान गया और अपनी कही बात भी मुझे ध्यान है मगर अब मुझे यहीं रहने दो मुझे इस गंदगी की आदत हो गयी है ॥ चारों बेटे वापस लौट गए।

तो ये अब आपको और हमें सोचना है की क्या वाकई हम सूअर बनते जा रहे है, सरकार के नियम और क़ानून किसी भी व्यक्ति किसी भी समाज और किसी भी देश को एक दिशा तो दे सकते है परन्तु संस्कार और व्यवहार तो हमें ख़ुद ही बनाने होंगे.

बुधवार, 12 मार्च 2008

हर आदमी कतार में है.

भीड़ से भरी ये दुनिया,
फ़िर भी है जल्दी में दुनिया,
बेचैनी सी छाई ,
संसार में है,
मैं क्यों रहूँ,
परेशान,
की जानता हूँ,
आज हर आदमी,
कतार में है॥

कोई खुशी -गम के,
कोई सुख-दुःख,
कोई लड़ रहा है,
जिंदगी से,
कोई मौत के,
इंतज़ार में है॥

कोई धारा के बीच,
कोई तूफानों में,
किसी को मिला,
मांझी का साथ,
किसी के सिर्फ़,
पतवार है हाथ,
सच है तो इतना,
हर कोई मंझधार में है॥

सबकी सीरत एक सी,
और सूरत पे,
अलग-अलग,
चढा हुआ नकाब है,
किसी एक की बात,
क्यों करें, जब,
पूरी कौम ही ख़राब है।
फर्क है तो ,
सिर्फ़ इतना कि,
कोई विपक्ष में है बैठा,
कोई सरकार में है॥

हर कोई आज किसी न किसी कतार में है , क्यों है न ?

हर आदमी कतार में है.

भीड़ से भरी ये दुनिया,
फ़िर भी है जल्दी में दुनिया,
बेचैनी सी छाई ,
संसार में है,
मैं क्यों रहूँ,
परेशान,
की जानता हूँ,
आज हर आदमी,
कतार में है॥

कोई खुशी -गम के,
कोई सुख-दुःख,
कोई लड़ रहा है,
जिंदगी से,
कोई मौत के,
इंतज़ार में है॥

कोई धारा के बीच,
कोई तूफानों में,
किसी को मिला,
मांझी का साथ,
किसी के सिर्फ़,
पतवार है हाथ,
सच है तो इतना,
हर कोई मंझधार में है॥

सबकी सीरत एक सी,
और सूरत पे,
अलग-अलग,
चढा हुआ नकाब है,
किसी एक की बात,
क्यों करें, जब,
पूरी कौम ही ख़राब है।
फर्क है तो ,
सिर्फ़ इतना कि,
कोई विपक्ष में है बैठा,
कोई सरकार में है॥

हर कोई आज किसी न किसी कतार में है , क्यों है न ?
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