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गुरुवार, 27 मई 2010

सच कहा जा रहा है कि ब्लोगजगत को इसकी जरूरत नहीं है ......अजय कुमार झा

भविष्य की एक ब्लोग बैठक का दृश्य

सोचा था कि इस पोस्ट में दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक की तीसरी कडीं में उस बैठक की बची हुई बातें , भविष्य में आयोजित की जाने वाली बैठकों की रूपरेखा और इसके लिए एक निश्चित स्थान का चयन जैसी बातों का जिक्र करूंगा ..........मगर जो सोचा है वही हो ये जरूरी तो नहीं है न । बस ये समझिए कि उस बैठक में , संगीता जी ने जहां ब्लोग्गिंग में आने से सभी शहरों में पहले से ही कुछ परिचितों की मौजूदगी का एहसास होने की बात कही । वहीं ललित जी ने भी ब्लोग्गिंग की ताकत पर अपनी राय रखी । इसके बाद कुछ औपचारिक और अनौपचारिक बातों के बीच विदाई का समय हो चुका था सो सब वहां से समूह चित्र खिंचवाने के बाद निकल पडे ।

अब संगठन पर कुछ बातें , बेबाक बात कहूं तो ठीक रहेगा । हालांकि अब भी मेरा मानना यही है कि देर सवेर संगठित होने की जरूरत तो पडेगी ही । मगर इधर कुछ दिनों से जो हालात बन रहे हैं , और भाई लोग जिस तरह से इसे निशाने पर रखे हुए हैं उसने सोचने पर मजबूर कर दिय है कि आखिर संगठन बनेगा किसके लिए । हमने क्या कोई प्रधानमंत्री चुनना है , क्या कोई आंदोलन खडा करना है , देश की स्थिति बदलनी है , या कि हमें इस संगठन बनाने से अपने अपने घरों की रसोई का जुगाड करना है भाई ? समझ में नहीं आ रहा है कि यदि ये सब नहीं करना है तो फ़िर ब्लोग्गर्स के एक होने को , वो भी बिना किसी दबाव या राजनीतिक सामाजिक आर्थिक बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए ,इस तरह से निशाने पर क्यों लिया जा रहा है ? आखिर किनकी नीयत पर शक किया जा रहा है ? और क्यों किया जा रहा है ? कौन कर रहा है ? मैं आप , सब , ।


ओहो ! मैं तो भूल ही गया था कि संगठन का विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि सबको डर है कि इससे गुटबंदी बढेगी , इससे कुछ लोग आपस में इकट्ठे होकर एक जैसा (और जाहिर है कि नकारात्मक और विध्वंसक ही , जैसा कि सोचा जा रहा है ) सोचेंगे । शायद किसी ब्लोग्गर के खिलाफ़ , या शायद बहुत से दूसरे ब्लोग्गर्स के खिलाफ़ मोर्चा बनाएंगे । और कुछ शब्दों में मठाधीशी करेंगे । वाह क्या सोच है , क्या बात है ? हैरत की बात है कि यदि ईरादे विध्वंसक ही होंगे तो फ़िर तो ये अब कहने की बात नहीं है कि जलजला , ढपोरशंख , कूप कृष्ण , अम्मा जी जैसे लोगों को इस ब्लोगजगत को दहलाने के लिए किसी संगठन की जरूरत कभी नहीं महसूस होगी । और हममें से ही कोई एक , ऐसा ही कोई नकाब ओढ कर कभी भी बिना संगठन बनाए पूरे ब्लोगजगत का रुख मोड देता है ।

अब रही बात तो ब्लोग्गर्स बैठक की । तो विचार तो यही था कि अब कोई एक ऐसा स्थान तय किया जाए जिसे निश्चित रूप से हम ब्लोग्गर्स बैठक के लिए ही निर्धारित कर दें ताकि समय पडने पर , या बाहर से किसी ब्लोग्गर मित्र के आने पर कम से कम हमें जगह तय करने में कोई जद्दोजहद न करनी पडे और किसी के लिए ये चिंता की बात न हो । जब मन किया सब मिल लिए । सोचा ये भी था कि आने वाले समय में तकनीक में महारत हासिल ब्लोग्गर्स मित्रों को दिल्ली आमंत्रित करके सभी तरह की तकनीकी सहयोग , जानकारी आदि देने समझाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा । और ............. छोडिए जी जाने दीजीए । .

.अब जबकि ये स्पष्ट हो चुका है कि ऐसे आयोजनों का एक दूसरा अर्थ भी होता है , इसे और भी एंगल से देखा और दिखाया जाता है । और हफ़्ते , महीने , साल बाद कोई इनके आयोजन पर ही प्रश्न चिन्ह उठा देता है तो कोई फ़ोन करके हिसाब किताब निपटाने की बात करता है । और सबसे बडी बात ये है कि ये वही लोग होते हैं जो आपके साथ बैठक में , आपके साथ इस ब्लोग जगत में , आपके साथ बनने बनाने वाली सभी योजनाओं में साथ होने रहने की हामी भरते हैं ।



अब तो यकीनन यही मन कर रहा है कि कुछ समय के लिए हम भी अनाम ही हो जाएं कोई नाम नहीं कोई पहचान नहीं , कोई संपर्क नहीं कोई संवाद नहीं , कोई लिहाज़ नहीं , कोई ठेकेदारी भी नहीं । कोई दिल्ली नहीं , कोई मुंबई नहीं , कोई मीट नहीं , कोई मसाला नहीं ...............और मैं तो अब यही करने वाला हूं ...बगैर किसी लिहाज़ के .....................और अभी भी किसी केए इतनी औकात नहीं हुई है कि वो किसी ब्लोग्गर को खरीद सके .........जब हो जाएगी ...तब देखा जाएगा ॥

मंगलवार, 25 मई 2010

दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक : संगठन और गुटबंदी का फ़र्क समझिए जनाब !


जैसा कि कल की पोस्ट में बता चुका हूं कि बहुत से साथी ब्लोग्गर्स ने ब्लोग्गर्स के किसी भी संगठन को लेकर उपस्थित बहुत से साथी ब्लोग्गर्स ने अपनी बातों को बेबाकी से रखा और ये बात सामने आई कि बिना उद्देश्य के किसी भी संघ का गठन दिशाहीन हो सकता है । ऐसे किसी भी संगठन के संभावित उद्देश्यों को सिलसिलेवार रूप से सामने रखा । उन्होंने एक अघोषित सा एजेंडा भी सभी ब्लोग्गर साथियों के समक्ष रखा । जितना मुझे याद रहा वो सब आपके सामने रख रहा हूं ।

मयंक सक्सेना जी ने बताया कि आज ब्लोग्गर्स के संगठन की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि ब्लोग्गिंग की बढती हुई ताकत और प्रभाव को बहुत जल्द ही देश , समाज, सरकार और मीडिया समझने वाली है , ब्लोग्गिंग चरित्र में निरंकुश और निर्भीक है । इसलिए स्वाभाविक रूप से इसके तेवर और धार बहुत ही तीव्र रहती है जो इन उपरोक्त संस्थाओं को देर सवेर नागवार गुजरने ही वाली है । जिस तरह से वैश्विक अंतर्जाल समूह में देखने सुनने पढने को मिल रहा है ये भी तय है कि प्रतिबंध और सेंसरशिप की गाज़ हिंदी ब्लोग्गिंग पर भी पडने वाली ही है एक दिन । उस दिन यदि उस ब्लोग्गर ने अपने आपको अलग थलग पाया तो उस दिन किसी ऐसे संगठन का न होना अधिक नुकसानदायक होगा ।

आज यदि पत्रकारिता से जुडे कुछ लोग ब्लोग्गिंग को लेकर किसी भी तरह की घटिया टीका टिप्पणी करके निकल जाते हैं तो वो सिर्फ़ इसलिए क्योंकि ब्लोग्गिंग के सकारात्मक पक्ष को जानबूझ कर नजरअंदाज़ किया जाता है । संगठन की जरूरत इसलिए है क्योंकि जब ब्लोग लेखन पर साहित्यिक गुटबंदी , धर्म अतिरेकता , और इस तरह के तत्व हावी होने लगें तो एक समूह ऐसा भी होना चाहिए जो इन सबके खिलाफ़ उठ खडा हो । कम से कम इतना तो जरूर ही कि ये मंशा जता सके कि पूरे ब्लोगजगत की राय ये नहीं है , या यही है ।


हिंदी ब्लोग्गिंग में भाषा , वर्तनी , अनुवाद आदि के क्षेत्रों में जो काम वो रहा है वो हाशिए पर चला जा रहा है । या उतना प्रखर नहीं है , या ये कहें कि उतना प्रखर होता दिख नहीं रहा है जितना अपेक्षित है । इसके लिए भी प्रतिबद्धता के साथ एक संगठन की जरूरत है जो इन बातों पर गंभीरतापूर्वक काम कर सके । जरूरी नहीं है कि हर ब्लोग्गर जो इससे जुडा हो वो यही काम करे , मगर इतना तो हो ही सकता है कि अपने अपने स्तर पर अपनी अपनी शैली में इसमें सहयोग कर सके ।


आज ब्लोग्गिंग में नियमित अनियमित ब्लोग्गर्स बैठक और कार्यशालाओं का जिस प्रकार से आकर्षण बढा है उसने ये जता दिया है कि भविष्य में ऐसे आयोजन और भी अधिक हों तो परिणाम सकारात्कम ही आएंगे । योजना कुछ इस तरह भी बनाई जा सकती है कि ब्लोग्गर संगठन के सदस्य अपने अपने क्षेत्रों में , स्कूल , कालेज और अन्य शिक्षण संस्थानों में ब्लोग्गिंग को विस्तार देने के लिए प्रयोगशालाएं आयोजित करें । भले ही आज इस तरह की योजनाएं बहुत ही प्रायोगिक न लगें मगर यकीनन एक दिन इनका मह्त्व जरूर ही समझा जाएगा ।

आज ब्लोग्गिंग में समाज के हर वर्ग के लोग जुडे हुए हैं । सभी के आसपास कुछ प्रिय अप्रिय , सुखद दुखद घट रहा है । यदि सुदूर प्रदेश में बैठा कोई ब्लोग्गर साथी चाहता है कि उसके आसपास किसी दुखद घटना के भुक्तभोगी को , किसी पीडित को , किसी स्वयंसेवी संस्था को सभी ब्लोग्गर्स की तवज्जो मिले , उनका साथ मिले , उनकी सहायता मिले तो क्या अच्छा हो यदि ऐसे कार्यों में कोई संगठन इस काम को अपने जिम्मे ले ।

इन्हीं बातों को साहित्य शिल्पी के संचालक श्री राजीव रंजन जी ने अपने ओजपूर्ण शैली में सबके सामने रखा । उन्होंने बताया कि आज ब्लोग्गिंग अधिक प्रभावी होती दिख रही है , वो इसलिए कि यही एक ऐसा माध्यम है जिसमें लेखक और पाठक के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है । किसी भी लेख को पढ कर उसका पाठक बेहिचक ये कह और लिख सकता है कि लेख बकवास है । अन्य किसी भी माध्यम में ऐसा संभव नहीं है । उनका मानना था कि जब तक हिंदी ब्लोग्गिंग में आलोचना को स्वस्थ अंदाज़ में नहीं लिया जाएगा तब तक हिंदी ब्लोग्गिंग परिपक्व नहीं हो सकेगी ।


अब कुछ अपनी बातें । मैं पहले तो उनसे ये बातें स्पष्ट कर दूं कि आखिर ब्लोग्गर्स के किसी भी संगठन को लेकर इतनी दुविधा की बातें क्यों उठ रही हैं । पहली बात तो ये कि इस संगठन के प्रयास को किसी भी तरह की गुटबंदी समझने की जो भूल कर रहे हैं , वे या तो खुद को भ्रम में रखने की कोशिश कर रहे हैं या फ़िर भुलावे में हैं । यदि इसी ब्लोग्गर्स बैठक का उदाहरण दूं तो इस बैठक में ऐसे बहुत से नए साथी थे जो सिर्फ़ ब्लोग बैठक में भाग लेने पहुंचे थे ,बिना किसी नाम की परवाह किए । और सभी के लिए बहुत से चेहरे और मित्र नए थे । तो क्या ये माना जाए कि वो फ़लाना गुट के हो गए । और रही बात किसी गुटबंदी की आशंका की तो हर नियमित (अब तो अनियमित भी ) थोडे दिन की ब्लोग्गिंग में ही जान जाता है कि यदि कोई गुट है तो वो क्या है कैसा है ।

चलिए कुछ तल्ख उदाहरण लेते हैं । मैंने पिछले दिनों भाई अविनाश वाचस्पति जी की पोस्ट पर बीना शर्मा जी द्वारा चलाई जा रही संस्था प्रयास के बारे में पढा था । मुझे भीतर से लगा कि उस संस्था के लिए कुछ न कुछ किया जाना चाहिए । मैं अविनाश भाई को अपनी तरफ़ से ढाई हजार का चेक थमा आया कि वे उसे यथोचित स्थान तक पहुंचा दें । इसी तरह भाई राजीव तनेजा जी ने साथी ब्लोग्गर के लिए एक हजार रुपए की राशि भी भाई अविनाश वाचस्पति जी को दे दी । तो यदि इस तरह के एकल प्रयासों को संगठित किया जाए और उन्हें मूर्त रूप दिया जाए । तो ये हर हाल में यहां ब्लोगजगत में चल रहे चिरकुटिया कुत्ता घसीटी के खेल से बेहतर ही होगा । यदि इसके लिए मुझ पर ये आरोप लगता है कि मैं फ़लाने ढिमकाने का गुट का हूं तो लगता रहे । सिर्फ़ कागजी महाभारत लडने से बेहतर है कि वास्तविक मुठभेड हो । इसी बात को आगे बढाते हुए कुछ और बातें जेहन में आ रही हैं । मान लीजीए कि कल को भाई अजित वडनेरकर जी "शब्दों का सफ़र" को या श्री दिनेश राय द्विवेदी जी के "तीसरा खंबा" पर लिखे जा रहे विधि के इतिहास को हम सभी ब्लोग्गर्स के प्रयास से एक ग्रंथ का रूप दिया जा सके तो कल्पना करिए कि क्या अद्भुत नजारा होगा । एक ग्रंथ जिसके लेखक खुद ब्लोग्गर , जिसके प्रकाशक भी ब्लोग्गर , जाने कितने ब्लोग्गर समीक्षा लिखते और जाने कितने हजार ब्लोगर उसका लोकार्पण में पहुंचते हुए । ये सब सिर्फ़ योजनाएं हैं ।

आशंका जाहिर की गई कि इस तरह तो एक संगठन के विरोध में भी कोई संगठन उठ खडा होगा तो । अरे वाह फ़िर तो क्या बात है , होना ही चाहिए । एक से भले दो , दो से भले चार । फ़िर तो ऐसे पावन उद्देश्यों के साथ एक न एक दिन वे सभी संगठन आपस में जुड ही जाएंगे । मगर शायद ईशारा संगठन नहीं गुटबंदी और गिरोहबंदी की तरफ़ था । इसमें कसूर भी नहीं है शायद । आखिर पिछले कुछ वर्षों में यही सब तो देखा सुना जा रहा है हिंदी ब्लोग्गिंग में ।

तो उन सबके लिए हमारा यही संदेश है कि , अब समय आ गया है कि जो सोचा जा रहा है वो तो होगा ही । जिनकी इच्छा हो , वे खुशी से साथ आएं और सहयोग दें । जो न आना चाहें उनसे भी हमें कोई शिकायत नहीं रहेगी । और जो इन प्रयासों पर उंगली उठाना चाहते हैं , उन्हें भी पूरा हक है ये करने का सो वे भी करते रहें बदस्तूर । मगर सिर्फ़ शब्दों की लडाई लडने से ही कलेजा चौडा नहीं हुआ करता , उसके लिए लोहे का जिगर रखना होता है ।


शेष कल की आखिरी पोस्ट में ...........संगीता जी और ललित जी की बातें , दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक के लिए नियमित स्थान का चयन .............आदि .....।

सोमवार, 24 मई 2010

दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक , एक कच्ची पक्की रिपोर्ट और कुछ बातें ब्लोग्गर्स संगठन पर -अजय कुमार झा










दिल्ली ब्लोग्गर्स की एक खासियत तो अब खुल कर सामने आने लगी है कि आपस में मिल बैठ कर बतियाने , और ब्लोगियाने के लिए उन्हें बस किसी बहाने भर की तलाश रहती है , और बाहर से आने वाला किसी ब्लोग्गर से मिलने के बहाने से खूबसूरत और कौन सा बहाना हो सकता है अब तक इसी तरह , श्री बी एस पाबला जी , श्री दीपक मशाल जी , श्री राज भाटिया जी , श्री अलबेला खत्री जी के दिल्ली आने पर इस तरह की बैठकों का आयोजन होता रहा है इस बार दिल्ली ब्लोग्गर्स को ये बहाना दिया ज्योतिष विशेषज्ञ ब्लोग्गर्स श्रीमती संगीता पुरी जी और छत्तीसगढ के मशहूर ब्लोग्गर श्री ललित शर्मा जी ने


संगीता
पुरी जी अपने किसी पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पहले ही दिल्ली पहुंची हुई थीं जबकि ललित जी का कार्यक्रम भी बन गया फ़टाफ़ट में तारीख और स्थान तय किया गया इतने अल्प समय में नेट और फ़ोन के माध्मय से जितनी सूचना जहां जहां तक पहुंच सकती थी वो पहुंचाई गई पश्चिमी दिल्ली के छोटूराम जाट धर्मशाला में रविवार २३ मई को दोपहर तीन बजे से शाम के : बजे तक इस ब्लोग बैठक का आयोजन किया गया जैसा कि पूर्व में की गई बैठकों में भी दिल्ली ब्लोग बैठकी का और कुछ उद्देश्य हो हो मगर एक सबसे अहम उद्देश्य होता है आपसी स्नेह को बांटना और एक दूसरे के अनुभवों को समझना किंतु इस बार ये थोडे मायनों में अलग इसलिए रही क्योंकि इस बार भाई अविनाश वाचस्पति जी की पहल पर और बहुत से साथी ब्लोग्गर्स के सुझाव के अनुसार ब्लोग्गर्स के किसी संगठन पर राय विमर्श करके कुछ निष्कर्ष निकाला जाए


बैठक
की शुरूआत औपचारिक परिचय के साथ हुई सबसे खुशी की बात ये रही कि इस बार पिछली बैठक में उपस्थित रहे तमाम ब्लोग्गर साथियों के अलावा और बहुत से नए साथी भी जोश खरोष के साथ पहुंचे थे इस बैठक में शामिल होने वाले ब्लोग्गर्स साथी थे , श्री ललित शर्मा जी , श्रीमती संगीता पुरी जी , श्री अविनाश वाचस्पति,श्री रतन सिंह शेखावत , श्री खुशदीप सहगल,श्री इरफ़ान, श्री जय कुमार झा, श्री एम वर्मा , श्री राजीव तनेजा , एवं श्रीमती संजू तनेजा , श्री विनोद कुमार पांडे , श्री पवन चंदन जी , श्री मयंक सक्सेना , श्री नीरज जाट , श्री अमित (अंतर सोहिल ) , सुश्री प्रतिभा कुशवाहा जी, श्री एस त्रिपाठी ,श्री आशुतोष मेहता , श्री शाहनवाज़ सिद्दकी , श्री सुधीर, श्री राहुल राय , डा. वेद व्यथित, श्री राजीव रंजन प्रसाद , श्री अजय यादव ,अभिषेक सागर , डा. प्रवीण चोपडा,श्री प्रवीण शुक्ल प्रार्थी , श्री योगेश गुलाटी , श्री उमा शंकर मिश्रा , श्री सुलभ जायसवाल ,श्री चंडीदत्त शुक्ला , श्री राम बाबू,श्री देवेंद्र गर्ग जी , श्री घनश्याम बाग्ला , श्री नवाब मियां , श्री बागी चाचा ,और मैं खुद यानि अजय कुमार झा इनके अलावा फ़ोन के माध्यम से भी हमारे बीच उपस्थित होने वालों में श्री समीर लाल , सुश्री शोभना चौरे जी , श्री ताऊ , और भी कई अन्य साथी इनके अलावा इस बैठक में एक जिस बालक ने सबसे बडी भूमिका निभाई ,वो रहा राजीव और संजू तनेजा जी के सुपुत्र माणिक तनेजा इस बालक ने पूरी बैठक के दौरान सबका ख्याल रखा और सबसे बढकर सारी तस्वीरें उतारीं जिन्हें आप देख पा रहे हैं


बैठक की शुरूआत सबके औपचारिक परिचय के आदान प्रदान से प्रारंभ हुई सभी साथियों ने अपना परिचय दिया अविनाश वाचस्पति जी ने , बैठक की प्रस्तावना पेश करते हुए कुछ अहम बातें कहीं हिन्दी ब्लॉगिंग को उन दोषों से दूर रखने का प्रयास करेंगे जो टी वी, प्रिंट मीडिया और अन् माध्यमों में दिखलाई दे रहे हैं। द्विअर्थी संवाद और शीर्षकों से बचे रहेंगे। जो भाषा हम अपने लिए, अपने बच्चों के लिए चाहते हैं - वही ब्लॉग पर लिखेंगे और वही प्रयोग करेंगे। ब्लॉगिंग को पारिवारिक और सामाजिक बनायेंगे, जिससे भविष् में इसे प्राइमरी शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके। ब्लॉगिंग में वो आनंद आना चाहिए जो संयुक् परिवार में आता है। यहां पर उसकी अच्छाईयां ही हों उसकी बुराईयों से बचे रहें। हम सबका प्रयास होना चाहिए कि जिस प्रकार आज मोबाइल फोन का प्रसार हुआ है उतना ही प्रचार प्रसार हिन्दी ब्लॉगिंग का भी हो परंतु उसके लिए हमें संगठित होना होगा। इसके लिए हमें एक संगठन बना लेना चाहिए। जो ब्लॉगर इस संबंध में पंजीकरण, नियमों इत्यादि की पूरी जानकारी रखते हों वो इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए कार्रवाई शुरू कर लें। उसमें कौन किस तरह से जुड़ेगा, किस पद पर रहेगा, यह सब आपसी सार्थक विचार विमर्श से तय किया जा सकता है पर शुरूआत हमें राजधानी से ही करनी होगी।

ब्लॉग की पोस्टों या टिप्पणियों में अपनी कुंठाओं को जाहिर नहीं करना चाहिए। आपने फिल्मों में ही सही झुग्गियों का माहौल देखा होगा जहां पर शिक्षा का प्रसार नहीं है। इस माहौल में जिस तरह से गाली गलौच का प्रयोग किया जाता है वो किसी को ठीक नहीं लगता।जिस प्रकार अपने बच्चों के लाभ के लिए हम सदा सक्रिय रहते हैं, उसी प्रकार ब्लॉगों के भले के लिए जागृत रहना चाहिए। और जो काम हम अपने लिए नहीं चाहते वो दूसरों के लिए भी करेंदेखना सारे फसाद उसी दिन खत् हो जायेंगे। हम सबको मिलकर हिन्दी ब्लॉग की दुनिया को बेहतर बनाना है। इस बेहतर दुनिया को फिर अपने पास पड़ोस में स्थापित करना है। एक दिन सब मोहल्लों में प्रत्येक नुक्कड़ पर ब्लॉगर मिलन हो रहा होगा फिर अलग से इस प्रकार के आयोजनों की जरूरत नहीं रह जाएगी और यह एक आदर्श स्थिति होगी। इसके अलावा विस्तार से और भी बहुत कुछ जिन्हें आप इस पोस्ट पर पढ सकते हैं इस बीच जलपान/कुछ भारी जलपान , और शीतल पेय का लुत्फ़ भी भरपूर उठाया जा रहा था इसके बाद शुरू हुआ विचार विमर्श


चूंकि
प्रस्तावना में ये बात कही गई थी कि ब्लोग्गर्स को एक साथ संगठित होने /किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है इसलिए स्वाभाविक रूप से बात उसी मुद्दे से शुरू हुई जैसा कि उपर कह चुका हूं कि बहुत से साथी जो पहली बार शिरकत कर रहे थे उन्होंने अपनी आशंकाओं , अनुमानों के साथ प्रश्नों की झडी लगा दी सबसे पहले बात उठाई मिश्र जी ने जिन्होंने ब्लोग्गर्स के किसी भी संगठन के निर्माण से पहले , या किसी भी संगठन को स्थापित किए जाने से पहले उसके उद्देश्यों को तय किये जाने की बात कहीं उन्होंने कहा कि बिना उद्देश्य कोई भी संगठन यदि तैयार भी कर लिया जाए तो उसका प्रतिफ़ल बहुत प्रभावकारी नहीं निकलेगा बात को आगे बढाया श्री एम वर्मा जी जिन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में ब्लोग्गर्स पर जो भी जिम्मेदारी बढने वाली है और संभावना है कि ब्लोग्गिंग की बढती ताकत को पहचानते हुए उसे दबाने की कोशिश की जाए तो इसके लिए अभी से तैयारी करना आवश्यक होगा डा. प्रवीण चोपडा जी ने भी संगठन को अपनी सहमति देते हुए उसका उद्देश्य भी तय करने का विचार रखा उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि अच्छा होगा कि चूंकि हम सब ब्लोग्गर्स आभासी रूप से एक दूसरे से जुडे हैं इसलिए क्या अच्छा हो कि एक औनलाईन फ़ोरम ही इसके लिए तैयार किया जाए उदाहरण रखते हुए उन्होंने बताया कि इस तरह का एक फ़ोरम फ़िलहाल मौजूद है तो सूचना के अधिकार के लिए बहुत ही सशक्त लडाई लड रहा है इसी के तर्ज़ पर इंडियाब्लोगर्स फ़ोरम जैसा कुछ बनाया जा सकता है इसके बाद इरफ़ान जी ने अपने ब्लोग्गिंग और कार्टून के पेशेगत अनुभवों को बांटते हुए बताया कि किस तरह उनके एक कार्टून ने न्यायपालिका तक को मजबूर कर दिया और यही अभिव्यक्ति की ताकत है


अरे रे रे रे ...........पूरे पांच साढे पांच घंटे तक चली इस बैठक का पूरा हाल मैं एक पोस्ट में तो नहीं दे सकता , कम से कम मुझ से तो ये नहीं होगा इसलिए कल की पोस्ट भी लिखनी पडेगी कल की पोस्ट में बातें करेंगे ..ब्लोग संगठन के संभावित उद्देश्यों की , ब्लोग्गिंग और हिंदी के संबंध की , ब्लोग्गिंग के उद्देश्य और उपयोगिता की , आगामी ब्लोग बैठक/कार्यशाला की रूपरेखा की ....और ..........अरे छोडिए कल खुद ही पढिएगा .............क्यों पढिएगा ......?????

साथ चलने वाले

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