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शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

दिल्ली ब्लॉग बैठकी का सिलसिला आगे बढ़ा , एक और बैठक हुई

अभी तो दिल्ली ब्लोग बैठकी की खुमारी तो पूरी तरह उतरी भी नहीं थी कि ये सिलसिला और आगे बढता सा जान पडा .....। आप सोच रहे होंगे यार ये झाजी तो अपनी ब्लोग्गर मिलन की अमर चित्र कथा पढा -दिखा कर ॥बिल्कुल पका देने पर तुले हुए हैं ...अब क्या करें जी जब हम बिलागर्स आपस में मिल बैठ के बतियाएंगे .....और जाहिर है कि ब्लोग्गिंग पर ही बतियाएंगे ....तो फ़िर उसे आप तक पहुंचाना भी तो हमारी ड्यूटी बन ही जाती है ...तो लिजीये हाजिर हैं ..।

दरअसल हुआ ये भाई दीपक मशाल ने सूचित किया कि उनकी स्वदेश वापसी हो रही है ...और उनका हवाई जहाज दिल्ली में ही उतरेगा सो सबसे मुलाकात हो जाए.....।तय कार्यक्रम के अनुसार वे पहुंचे और सबसे पहले खुशदीप भाई से उनकी मुलाकात हुई ॥वहीं से फ़ोनियाते हुए ये तय करने का प्रयास हुआ कि मुलाकात कहां हो ...।अपने राजीव भाई जैसे पहले ही ताक में बैठे थे ....फ़ट से न्योता दे डाला कि कल यानि ..२६/११/०९ को दोपहर का भोजन उनके यहां पर किया जाए...। हमने भी हामी भर दी .....एक और बैठकी का बहाना ...भला हम कहां छोडने वाले थे ॥ मगर छब्बीस की सुबह जब राजीव भाई (श्री राजीव तनेजा जी , हंसते रहो वाले) का फ़ोन आया तो ...बुलबुल की तबियत और कुछ कार्यालयीय मजबूरियों के कारण मैं थोडी अनिश्चितता दिखाई .......मगर उन्होंने अगले ही पल भाभी जी यानि श्रीमती संजू तनेजा जी से रिक्वेस्ट डबल करा दी । धर्म संकट बढ गया था ॥


हमने भी बचपन में स्कूल बंक करके पिक्चर देखने के लिए अपनाई जाने वाली सफ़ल तकनीक का अचूक उपयोग किया ...किसी बहाने से निकले...रास्ते में स्कूटर में वर्दी उतार कर रखे कपडे पहने और ...चल दिये तनेजा निवास । रास्ते में ही सूचना मिल गई कि छोटे मियां भाई दीपक मशाल पहले ही पहुंच चुके हैं । उनके घर पहुंचे और दीपक को देखने के बाद मेरे मन में जो पहला ख्याल आया वो ये था कि ...यार यदि अपने ब्लोग्गर्स को लेकर एक फ़ैशन परेड कराई जाए तो हिट रहेगा ...महफ़ूज़ अली, दीपक मशाल, खुशदीप सहगल....एक से एक स्मार्ट छोरों की लाईन है अपने पास ........। शो स्टौपर के रूप में उडन जी को लपेट लेंगे .....। वहां पहुंचे तो राजीव भाई के पडोस में रहने वाली विख्यात हास्य कवि ...बागी चाचा भी पधारे ...और कुछ ही देर में श्री एम एल वर्मा जी भी पहुंच गये ॥बाद में पता चला कि वे भी हमारी तरह ही बीच से निकल आए हैं॥ बस फ़िर तो कवियों और हास्य की धारा ऐसी बही कि पता ही नहीं चला कि कब समय बीत गया ...चाय, नाश्ते ,पकौडे , भोजन, फ़िर चाय कौफ़ी का दौर खूब लंबा चला ...और क्यों न चलता ,श्री राजीव भाई जितनी लंबी पोस्ट लिखते हैं उतना ही लंबा आयोजन भाभी जी ने खाने पीने का बना दिया । इसी बीच फ़ोटो शूट हुई ॥सबको एक साथ एक ही फ़ोटो में समेट लेने की हमारी दुविधा को हल किया ...राजीव भाई के सुपुत्र ने ...जिसने हम सबके मोबाईल से सबकी फ़ोटो बारी बारी खींची ....देखिये न


( बैठे हुए बाएं श्री एम एल वर्मा , और बागी चाचा ,
बाएं से राजीव भाई, दीपक मशाल, अजय कुमार झा और श्रीमती संजू तनेजा )




बात ही बात में हम लोगों ने बागी चाचा , श्री एम एल वर्मा जी , राजीव भाई , और दीपक मशाल की रचनाओं के पाठ का आनंद भी लिया । हमारे आग्रह पर कि ,बागी चाचा जैसे साह्त्यकारों को भी हिंदी ब्लोग्गिंग में लाया जाए...और बागी चाचा तथा ,श्री एम एल वर्मा और खुद हमारी कई तकनीकी शंकाओं के निवारण हेतु राजीव भाई ने एक इंस्टेंट कंप्यूटर क्लास लगाई ....बांकी विद्यार्थी तो क्लास ले रहे थे ॥हम पोस्ट बनाने के चक्कर में फ़ोटिया रहे थे....ठीक कर रहे थे न ....।

लेकिन इन सब बातों के बीच एक बात और तय हुई कि अब हम लोगों को कोई एक निश्चित स्थान ...तय करना चाहिये जहां समय समय पर सबसे मुलाकात और बात की जा सके ....तो आप तैयार हैं न .....उस समय और स्थान पर हमें गले लगाने और गले लगने को ॥

दिल्ली ब्लोग बैठकी का सिलसिला आगे बढा ...

मंगलवार, 24 नवंबर 2009

दिल्ली ब्लोग बैठक में हुआ फ़ोटो शूट (आखिरी रपट)

आप लोग सोच रहे होंगे कि दिल्ली ब्लोग बैठकी में खाली खूब गंभीर बातें, विचार-विमर्श,और यही सब कुछ हुआहोगा नहीं जी ...जब राजीव तनेजा जी , कार्टूनिस्ट इरफ़ान भाई ...और स्लौग ओवर स्पेशलिस्ट खुशदीप जी एकसाथ मौजूद हों और ऊपर से साथ में हम खुद ,भरी हुई बस में कंडक्टर की तरह लटके हुए हों तो ...और हम सबकेऊपर श्री बी एस पाबला जी और वकील साहब भी मार्गनिर्देशन हो तो फ़िर चुहल हो ....ऐसा तो संभव तो नहीं थाअब ज्यादा क्या कहूं ॥पाबला जी तो हमेशा की तरह अपने अचूक हथियार...अपने कैमरे से पहले ही लैस थेहम सब भी कौन कम थे .....अपनी अपनी गुलेल (अजी उनके कैमरे जो किसी भी रूप में के छप्पन से कमनहीं था ॥उसके सामने तो हमारा मोबाईल गुलेल ही था ) को तान कर जो निशाने लिये ....देखिये आपके सामने हीहै

... ... (ये पाबला जी सारी फ़ोटुएं खींच ले रहे हैं मैं भी अपने मोबाईल से खींच लूं खुशदीप भाई ....यार पोस्ट ठेलने के काम आएंगी ........?)











(
यार एक कार्टूनिस्ट भी फ़ोटो खेंच सकता है......अरे आप नहीं मानते लिजीये देखिये ...सबका ऐसा कार्टून बना दूंगा कि.....कि असली चेहरा सामने जाएगा )














{अरे नहीं नहीं इरफ़ान जी .....देखिये आप जो फ़ोटो खींच रहे हैं ......उसमें ये वाला लीगल ऐंगल डालिये ....फ़िर
चाहे ......फ़िर मजे से वो बवाल टाईप....(बवाल टाईप वाला कार्टून याद है ) ........भी बनाईयेगा तो कोई आपका खंबा नहीं हिला सकता .....अरे ये तीसरा खंबा की गारंटी है जी }













(हाय राम ......ये सब तो अपने अपने एंगल से फ़ोटो खींच रहे हैं ....मेरा राजू (राजीव भाई ) कहीं पीछे रह
जाए...जल्दी से मैं भी खेंच लूं ......आखिर अपने ब्लोग में भी तो कुछ लगा लूंगी .....)














" अमा, छोडो ये फ़ोटो शोटो हम तो टीवी वाले हैं भाई .....बडे कैमरे वाले....यार ये सब फ़ोटो में लगे हैं फ़टाफ़ट नोटस
बना लेता हूं ....जाते ही सबसे पहली पोस्ट मैं ही ठेल दूंगा ......खुशियों के ऐसे दीप जलेंगे....लोग ये फ़ोटो शोटो सब भूल जाएंगे.......साथ में एक स्लौग ओवर

सोमवार, 23 नवंबर 2009

ब्लौग बैठक में हुई सकारात्मक और नकारात्मक लेखन पर चर्चा


हां तो पिछली पोस्ट और उससे पिछली में अधिकांश बातें , जो ब्लोग बैठकी में हुई वो आपको बता ही चुका हूं ....अब जो कुछ बचा रह गया है ॥उसे भी बताए देता हूं ....हा हा हा ....मुझे मालूम है ॥आप सोच रहे हैं ...यार कित्ता बतिया लिए इतने में ही मुआं रिपोर्ट खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही ॥दुम पे दुम जोडे चले जा रहे हैं झा जी .....नहीं जी आप बिल्कुल मत घबराईये .....बस ये कुल आखिरी ......अरे नहीं नहीं आखिरी से पहले वाली पोस्ट है .....चलिये आप तो ये सुनिये कि अगली बात क्या हुई ॥

हमारे बीच बहस का अगला मुद्दा या कहूं कि जिस बिंदु पर चर्चा हुई वो था इन दिनों ब्लोग्गिंग में जारी धर्म विषयक लेखन ॥ हालांकि अभी ये सब थोडा शांत है ,मगर चूंकि अभी कुछ समय पहले ही धर्म आधारित पोस्टो और आरोप -प्रत्यारोप , छीछालेदारी का जो दौर चला था उसने तो जैसे कुछ समय के लिये हिंदी ब्लोग्गिंग को एक जगह केंद्रित सा कर दिया था । सभी बडे छोटे ( यहां, अनुभव , लेखन, उम्र सब के हिसाब से कह रहा हूं ) ब्लोग्गर्स पोस्ट और पोस्ट नहीं तो टिप्पणियों या प्रति टिप्पनियों के माध्यम से चाहे अनचाहे उस में पड रहे थे ......मगर ये सब ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाता है सो इश्वर की क्रपा से सब जल्दी ही शांत हो गया ॥ इस मुद्दे पर बात रखते हुए सबने जो बातें अलग अलग रूप में कहीं उसका निहितार्थ था .....कि धर्म एक ऐसा विषय जो नितांत निजि है और उसे वैसे ही माना और रखा जाना चाहिये । बात हुई कि तो फ़िर ऐसे में क्या किया जाए जब कुछ लोग जानबूझ कर ॥ऐसी बातों को उभारते हैं जो आक्रामक माहौल बनाती हैं ...और फ़िर वो सब बोला और बुलवाया जाता है जो शायद वो कतई नहीं चाहता ....इसके लिये भी सबके अलग अलग मत थे ॥मसलन वही उनकी उपेक्षा की जाए....उन पर ध्यान ही न दिया जाए....,,आदि आदि॥मगर मुझे लगता है कि एक बार या दो बार पोस्ट आने के बाद ऐसी मंशा वाले लेखकों से निपटने के लिए ऐग्रीगेटर्स को ही कुछ न कुछ सोचना और करना चाहिये .....प्रतिबंधित न सही तो कम से कम से ब्लैक लिस्ट तो कर ही देना चाहिये .......॥




इसी क्रम में चर्चा के दौरान मैंने भाई खुशदीप और मुख्य रूप से द्विवेदी जी से प्रश्न किया कि आखिर ऐसा क्यों लगता है कि अक्सर नकारात्मक लेखन .....सकारत्मक लेखन पर हावी हो जाता है । सबका मानना था कि ऐसा नहीं है ॥क्योंकि विवाद को जितना भी खींचा जाए ,बढाया जाए, मगर सर्वकालिक लेखन ही हमेशा याद रखा जाता है .....और उसीका लेखक भी । और फ़िर नकारात्मकता की ओर सुलभता से आकर्षित हो जाना तो मानव का स्वाभाविक चरित्र है । यहां मुझे एक किस्सा याद आ रहा है जो शायद इस बात को ज्यादा बेहतर तरीके से सामने रख सके । एक बार एक विद्यालय के सामने एक छोटी सी बच्ची अपनी कोई बात एक पैंफ़लेट के माध्यम से सबको पढाने की कोशिश कर रही थी । वो विद्यालय के सामने से गुजरने वाले हरेक पैदल, गाडी वाले को रोक कर वो पैंफ़लेट पकडाती ...पकडने वाला एक उचटती सी निगाह उस पर डालता और थोडा सा आगे बढते ही उसे फ़ेंक कर आगे चल जाता ॥ इसी बीच एक मोटर सायकिल सवार ने बच्ची के पास आके कुछ कहा ...। बच्ची ने अगले व्यक्ति को वो पैंफ़लेट मोड तोड कर पकडाया ,......उस व्यक्ति ने कौतूहलवश उसे लेकर पूरा पढा ...और आने जाने वाले दूसरों को भी उत्सुकता हो गई ॥


कहने का मतलब ये कि ये तो मानव का स्वभाव है तो फ़िर जाहिर कि लेखनी में कैसे इस स्वभाव से अलग रहने की अपेक्षा की जा सकती है ॥। बस इस सबके अलावा हो बातें हुई वो आपसी स्नेह और हमारी आपसी चुटकियां थी ....जी हां और उन सबके बारे में आपको बताऊंगा अपनी अगली और आखिरी रिपोर्ट में ॥


शनिवार, 21 नवंबर 2009

दिल्ली ब्लॉग बैठक में हिन्दी ब्लॉग्गिंग और मीडिया पर चर्चा


पिछली दोनों पोस्टों में दिल्ली ब्लोग बैठकी और पाबला जी , तथा द्विवेदी जी केदिल्ली प्रवास के दौरान हुई चर्चाओं पर मैं काफ़ी कुछ लिख चुका हूं .. आजउसी को आगे बढाते हुए फ़िर कुछ उन मुद्दों पर लिखने जा रहा हूं जो हमारीबातचीत के दौरान निकल कर सामने आई ॥इनमें से पहला मुद्दा था ..हिंदीब्लोग्गिंग और मीडिया ...इससे जुडी दो बातें मुख्य रूप से हमारे बीच चर्चा केलिये आईं पहली ये कि क्या सचमुच ही हिंदी मीडिया ..यहां मीडिया से मेरा तातपर्य प्रिंट मीडिया का है ...हिंदीब्लोग्गिंग और ब्लोगर्स को महत्व देने लगा है ....और क्या देर सवेर ये महत्व बढने वाला है

बात जब निकली तो जिक्र हुआ ..विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं द्वारा नियमित अनियमित रूप् से स्तंभों केमाध्यम से ब्लोग पोस्ट्स को स्थान दिये जाने के बढते हुए चलन की चूंकि पाबला जी का अनोखा ब्लोग ब्लोगऔन प्रिंट इसी विशेषता को लिये हुए है और हमारी भी भागीदारी उसमें होती है सो जाहिर था कि इस विषय परखुल कर बातें हुई बैठक के दौरान खुशदीप भाई ने वही बात उठा दी जो कुछ दिनों पहले अविनाश वाचस्पति जीने उठाई थी ...यानि जो भी समाचार पत्र ब्लोग पोस्ट्स को उठा कर छाप रहे हैं उन्हें इसके एवज में कुछ पारिश्रमिकके रूप में ही सही उस पोस्ट के लेखक को भी देना चाहिये यहां विमर्श के दौरान मैंने अपना वही मत रखा जो मैंपहले भी कहता रहा हूं इस विचार से अलग मेरा मानना ये था , जिसे मैंने कहा भी कि ....आज यदि ब्लोग पोस्टसका जिक्र हिंदी के समाचार पत्रों में किया जा रहा है तो हर लिहाज से सिर्फ़ महत्वपूर्ण है बल्कि हिंदी ब्लोग्गिंग केलिये फ़ायदेमंद भी है आज ब्लोग पोस्ट्स को वही लोग पढ पा रहे हैं जो नेट के माध्यम से जुडे हुए हैं मगर जब येपोस्ट किसी समाचार पत्र या पत्रिका में जाती हैं तो इसका दोहरा लाभ होता है पहला ये कि आपकी कही गयीबात को विस्तार मिल जाता है ..यानि पत्र-पत्रिका के माध्यम से वो लाखों लोगों की पहुंच में जाती है ..दूसरा येकि चूंकि उनमें ब्लोग्स का जिक्र भी होता है इसलिये स्वाभाविक रूप से पढने वाले के मन में ब्लोग्स के प्रति , ब्लोग्गिंग के प्रति जो जिज्ञासा पैदा करती है ....वो कालांतर में एक नया ब्लोगर के रूप में सामने आती है

रही बात पारिश्रमिक के रूप में कुछ देने की तो जो पत्र नियमित रूप से ब्लोग पोस्ट्स लगा रहे हैं वे उसे संपादकों केनाम पत्र , या पाठकों की राय ....जैसे स्तंभों के विकल्प के रूप में स्थान दे रहे हैं जिसके लिये जाहिर है कि कोईपारिश्रमिक नहीं दिया जाता हां जो पत्र पूरी पोस्ट को आलेख के रूप में छाप लेते हैं उन्हें जरूर इस विषय मेंसोचने के लिये कहा जाना चाहिये क्योंकि आखिर उस पोस्ट की जगह छपने वाले आलेख के लेखक को भी तो वेभुगतान करते ही होंगे हालांकि पाबला जी , और हम सबके बीच इस बात की भी चर्चा हुई कि अधिकांश पत्र ..बारबार एक ही जैसी पोस्टों, बल्कि ब्लोगों , को स्थान देते हैं जिससे उसकी उपयोगिता थोडी कम सी हो गई है वैसेइसका एक कारण जो मेरी समझ में आया वो ये कि जिस तरह प्रिंट मीडिया में एक बीट से जुडे सभी लोग ..चाहे वोफ़ील्ड में हों या डेस्क पर आपस में तालमेल बनाए रखते हैं ..उसी तरह इन पत्रों में ब्लोग पोस्ट्स को स्थान देनेवाले भी तो आपस में संवाद करते ही होंगे तो सभी पत्रों में एक ही तरह की पोस्टों को स्थान मिलने पर कोई आश्चर्यनहीं होना चाहिये॥

हिंदी ब्लोग्गिंग और मीडिया के संदर्भ में मेरा दूसरा प्रश्न था पाबला जी से किजैसा कि कहा जा रहा कि ...हिंदी ब्लोग्गिंग वैकल्पिक मीडिया का रूप लेता जारहा है ..तो क्या ये सच में हो रहा है मेरे पूछने का मंतव्य था कि ....पाबला जीमैंने जब ब्लोग्गिंग की ताकत के बारे में सुना था तो ..इराक युद्ध के दौरान चर्चामें आया ब्लोग सलाम पैक्स के बारे में पढा था ..सुना था कि इस ब्लोग कीपोस्ट इतनी प्रभावी थी कि बीबीसी जैसी संस्था तक उस पर आधारित होकररिपोर्टिंग कर रही थी ...तो क्या ये कभी संभव है कि ये हिंदी ब्लोग्गिंग में कुछ ऐसा हो सके ...पाबला जी ने मेरीआशा के अनुरूप दोनों संभावनाएं व्यक्त कीं....ऐसा नहीं है अभी हिंदी ब्लोग्गिंग में कुछ साहसिक नहीं हो रहा हैमगर उस स्तर का नि:संदेह नहीं हो पा रहा है और इसके बहुत से कारण हैं निकट भविष्य में ऐसा हो पाएगाइसकी उम्मीद भी नहीं है ..मगर ये असंभव जैसा भी नहीं है जब ब्लोग्गर्स विकल्प और बदलाव को परखने कोऔर खुद को उसके लिए झोंकने के लिये परस्तुत करेंगे तो हिंदी ब्लोग्गिंग भी अपने नये आयाम स्थापित करेगी


देखिये आज फ़िर बात एक ही मुद्दे पर कितनी लंबी हो गई ..और हां मेरे से फ़ोटुएं किसी तरह रो पीट के एक आधही लोड हो पाती हैं सो पाबला जी से निवेदन कर दिया है ...पोस्ट मैं ठेले जा रहा हूं और भर भर के फ़ोटुएं वे दिखाएंगेऔर विश्वास रखिये ..वो कमाल की होंगी .....॥आगे बात करेंगे ....चलिये जब करेंगे ..तभी करेंगे ........................
... ....

गुरुवार, 19 नवंबर 2009

ब्लोग्गिंग में कमाई के लिये खुद को तैयार कर रहे हैं न .....नहीं तो ..करिये न...?

जैसा कि पिछली पोस्ट में बता चुका था कि पाबला जी के दिल्ली प्रवास के दौरान उनसे ब्लोग्गिंग से जुडे बहुत से विषयों, मुद्दों, समस्याओं पर विस्तार से बातें हुई ॥जाहिर है जब पाबला जी जैसे तकनीकी विशेषज्ञता हासिल व्यक्ति का सान्निध्य मिले तो और मेरे जैसा खुराफ़ाती शागिर्द ..तो बहुत सी बातें निकल कर सामने आती हैं । और आई भी...मैंने उनसे वो तमाम सवाल पूछ डाले जो ..मेरी तरह तकनीकी शून्य ब्लोग्गर उनसे पूछने की तमन्ना रखता था ॥

और मैंने बहुत से सवाल पूछे ..वैसे मुझे लगता है ..लगता क्या है ..महसूस हुआ कि पाबला जी जैसे तकनीक महारत और सहायता करने को उद्धत व्यक्ति को किसी भी ब्लोग संगोष्ठी, सम्मेलन, और बैठक में शामिल करना ..उस आयोजन की सफ़लता में चार चांद लगा सकती है । मुझे पता है कि हमारे बहुत से तकनीकी ज्ञान रखने वाले मित्र ब्लोग्गर सोच रहे होंगे कि मैं ऐसा सिर्फ़ पाबला जी के बारे में ही क्यों सोच रहा हूं ..दरअसल उसके पीछे जो एक विशेष कारण है वो ये कि एक तो उनका सतत किसी भी सहायता के लिये खुद को उपस्थित कर देना....दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण ये कि ..किसी भी नयी तकनीक या और किसी बात को समझना बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि सामने वाला उसे किस तरह से समझाता है ..और जाहिर है कि पाबला जी को उस कला में भी दक्षता हासिल है । खैर अब सुनिए कि मुद्दे की बातें क्या क्या थीं :-


मेरा प्रश्न था कि आखिर हिंदी ब्लोग्गिंग और कमाई .....ये दूसरे कभी एक दूसरे से मिल पाएंगे । अंग्रेजी ब्लोग्गिंग या किसी अन्य भाषा के स्तर तक न सही मगर क्या ये संभव है कि .भविष्य में हिंदी ब्लोग्गिंग भी कमाई का पर्याय बन सके। इस बिंदु पर पाबला जी ने स्पष्ट किया कि ...देर सवेर ये तो होना ही है ..और होगा ही । मगर उससे पहले ये जानना जरूरी है कि ..क्या हम हिंदी के ब्लोग्गर्स इस कमाई के लिये खुद को , अपने ब्लोग को , अपनी पोस्टों को तैयार कर रहे हैं ......? मतलब हममें से कितने लोग ये जानते हैं कि हमारे पाठक हमें क्यों पढते हैं ..। जो सर्च इंजनों से ढूंढते हुए हम तक पहुंचते हैं ...वे आखिर क्या ढूंढते हुए आते हैं ...आखिर कौन किस सर्च इंजन का इस्तेमाल करते हुए हम तक पहुंचता है .....वे कौन कौन से उपाय हैं , वो कौन कौन सी बातें हैं जिनका ध्यान हमें पोस्ट लिखते हुए रखना चाहिये ..और ये सब उन शब्दों, उन विषयों, को ध्यान में रखते हुए करना चाहिये जो शब्द पाठकों को हमसे चाहिये....जी हां इसका विशलेषण भी किया जा सकता है ॥

अब बात इसकी कि आखिर इसकी जरूरत क्या है..तो पाबला जी के अनुसार.... है और बहुत ही ज्यादा जरूरत है ..जब ब्लोग्गिंग में कमाई के दरवाजे खुलेंगे तो ..यही वो पैमाने होंगे जो तय करेंगे कि आपकी कमाई का ग्राफ़ कितना ऊपर नीचे होगा । इसी संदर्भ में ब्लोग बैठक के दौरान खुशदीप जी ने ये जिज्ञासा जाहिर कि ..क्या ऐसा संभव नहीं है कि जो सेवाएं गूगल दे रहा है ..कमाई के संदर्भ मे...वो सेवा कोई अन्य / या भारतीय कंपनी दे ......? मुझे और सबको ये जानकर हैरानी हुई कि ...ऐसी सेवा तो अभी भी दी जा रही है ..जिसकी जानकारी पाबला जी पहले ही दे चुके हैं ..ये अलग बात है कि बहुत से ब्लोग्गर्स को इसकी जानकारी नहीं है ॥

इसके बाद हमारा विषय रहा..ब्लोग्गिंग का सबसे प्रिय विषय ....टिप्पणी ...उसका महत्व , उसका चरित्र , । दिनेश द्विवेदी जी का कहना था कि ..टिप्पणियों की संख्या और अधिकता से बेहतर है कि टिप्पणियां एकदम सटीक हों ..सबसे जरूरी ये कि टिप्पणियों को पढने पर पता चलना चाहिये कि...... हां लेखक जो कहना चाहता है पाठक उसे समझ रहा है ॥यहां ये बात बताना दिलचस्प रहेगा कि ..शायद लोगों को पता हो न हो ...मगर ये सच है कि टिप्पणियां भी सर्च इंजन में आपकी रफ़तार बढाने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ॥एक और बात पाठकों को पोस्ट पढने में मिलने वाली तकनीकी मदद, उसके लिये जरूरी विजेट्स, पाठकों का मनोविज्ञान , आदि जानने के लिये मैंने फ़िर से पाबला जी के मस्तिष्क कंप्यूटर को तंग किया । और मिली जानकारी से हैरत में था ॥न तो मेरी इतनी काबिलियत है कि मैं उन्हें आपके सामने रख सकूं न ही ये कि किसी भी तरह बता समझा सकूं । सो पाबला जी से आग्रह किया है कि इसे सबके लिये धीरे धीरे ही सही ..सामने रखें जरूर॥

चलिये आज के लिये इतना ही ..कल बात करेंगे ..ब्लोग्गिंग और मीडिया,हिंदी ब्लोग्गिंग को महत्व देता प्रिंट मीडिया , नकारात्मक और सकारात्मक लेखन आदि पर ..और सबसे अंत में ..इस बैठक से जुडी कुछ चुटीली यादें और फ़ोटूएं भी दिखाने की कोशिश होगी । मगर फ़ोटू की असली खुराक तो पाबला जी ही पूरी करेंगे आपकी ...हमारे पास तो जो है सो सामने है ......

बुधवार, 18 नवंबर 2009

कौन कहता है ये आभासी दुनिया है ,दिल्ली में ब्लौग बैठकी के बहाने ,


ब्लौगिंगि में रहते हुए हम चाहे अनचाहे एक दायरा , एक रिश्ता कायम कर ही लेते हैं और इसके बनने केबाद फ़िर सिलसिला शुरू होता है निरंतर संवाद का ये संवाद सिर्फ़ ब्लोग्गिंग और उसके विषयों तक हीनहीं सिमित रहता , धीरे धीरे इसमें परिवार, हमारेअपने उनके अपने, उनका सुख दुख सब शामिलहोता जाता है ये बात मानता तो मैं शुरू से ही थामगर इस बात का प्रमाण मिल गया पिछले चारपांच दिनों में ही पाबला जी से लगभग नियमित संवाद होते रहने के कारण मन में अब ये हूक उठनेलगी थी कि कब उनसे मिला जाए। लगता था कि बस अब बहुत हुआ अब तो एक बार उनकाआशिर्वाद लेकर उनके गले लगने का समय ही गया है सो इच्छा जाहिर कर दी गयी। आगे कीकहानी तो पाबला जी खुद बता ही चुके हैं मेरे आग्रह को बिल्कुल टाल नहीं सकने की स्थिति में उन्हेंमेरे घर में ही रहने का मेरा अनुरोध मानना ही पडा। भिलाई से निकलते हुए संदेश छोडा जा चुका थाकि कब पहुंच रहे है बस इसके बाद इंतज़ार की घडियां शुरू हो गई ट्रेन कुछ विलंब से पहुंची


श्रीमती जी भी पहले से ही पाबला से से परिचित थी ...मेरी तरह हीनेट के माध्यम से ..सो वे भी काफ़ी उत्साहित थी ..आखिर उनकीपार्टी बडी होने वाली थी ।पाबला जी के साथ पहली बार आमनासामना हुआ तो जादू की झप्पी ने मीठी ठंड के बीच जिस नर्मउष्मा का एहसास कराया उसे मैं शब्दों में नहीं ढाल सकता पाबला जी के घर पहुंचते ही ..वही हुआ जिसकी मुझे आशंका थी ...श्रीमती जी को जहां उनमें अपनेमिंटू पाजी दिख रहे थे ..वहीं पाबला जी को भी ......वे अपनी छोटी बहन सी लगीं ऊपर से सोने पेसुहागा ये कि दोनों ही दनदनाती पंजाबी में शुरू हो गये...और हम हो लिये किनारे जैसा कि पहले हीतय कर चुके थे कि ..पाबला जी और द्विवेदी जी दिल्ली आगमन के शुभ अवसर को यूं तो खाली हाथसे जाने नहीं देंगे सो आनन फ़ानन में एक ब्लोग बैठक आयोजन करने का निर्णय लिया मैंने फ़टाफ़ट जहां भी जो उपयुक्त स्थान मिला उसे बुक किया गया और पोस्टों के माध्यम से सूचना भीपहुंचाई गई..मेरे पास जिनका संचार संपर्क था उन्हें निजि रूप से भी सूचित किया गया


पाबला जी के दिल्ली प्रवास के दौरान जो चर्चा और बातें हुई वो तोमैं आपसे अलग अलग पोस्टों के माध्यम से बांटूंगा ही फ़िलहालतो आप ब्लोग बैठक का हाल जानिये समय ११ बजे से तय थासो मैं और पाबला जी समय से पहले ही वहां पहुंच चुके थे सबसेपहले आने वाले मित्र ब्लोग्गर थे श्री राजीव तनेजा जी जो अपनेवादेनुसार सपत्नीक श्रीमती संजू तनेजा जी के साथ पधारे , उन्हें भी फ़टाक से पाबला जी की झप्पीमिली.. भाभी जी को साथ आये देख हमारा तो हौसला और बढ गया , हम उनसे फ़रीदाबाद में भीमिल चुके थे , आखिर हमने उन्हें कह ही दिया कि जब भी ब्लोगजगत में किसी ब्लोग्गर को पत्नीसंकट का सामना करना पडा तो वो बेधडक राजीव भाई और संजू भाभी का उदाहरण दे कर अपनाबचाव कर सकता है इसके बाद आये खुशदीप भाई ...अब जब चार यार जमा हो ही चुके थे तो फ़िरतो सब्र कहां और चैन कहां ..इरफ़ान भाई के चुटीले कार्टूनों और उनकी मार , खुशदीप भाई के स्लौगओवर , और राजीव भाई की पहेली की आपसी नोंक झोंग होती रही हम राजीव भाई से मनवाने मेंलगे थे कि अब उनकी पोस्टों की लंबाई सिर्फ़ पौने दो किलोमीटर ही होनी चाहिये ..वे डेढ पर अडे थे ..इस बीच द्विवेदी जी जिनके वल्ल्भगढ से निकल पडने की सूचना हमें मिल चुकी थी ..उनका इंतजारलंबा ही होता जा रहा था ..खैर हमारे नाशते ..(अरे स्नैक्स फ़्नैक्स जी ), को निपटाते निपटाते उनकीआवक भी हो गई समय बीत रहा था ..कैसे किसी को पता नहीं चल रहा था

बीच बीच में , मित्र ब्लोग्गर्स के नहीं पहुंच पाने और नहीं सकने के फ़ोन संवाद भी मिल रहे थेमगर जब सारे दिग्गज बैठे ही थे तो फ़िर सिलसिला रुकने वाला कहां था ... खाना पीना निपटातेनिपटाते ..भाई .विनीत उत्पल भी पहुंच गए ... हमारे बीच जिन जिन मुद्दों पर बात हुई वे थे ..हिंदीब्लोग्गिंग में एक अघोषित आचार संहिता की जरूरत, हिंदी ब्लोग्गिंग और तकनीक , अंग्रेजी औरहिंदी ब्लोग्गिंग में फ़र्क , नकारात्मकता और सकारात्मकता , मीडिया और ब्लोग्गिंग , और्ब्लोग्गिंग और पाठक , टिप्पणियां उनका महत्व और चरित्र , और बहुत सारे विषय ..जिन परविस्तार से अगली पोस्ट में लिखूंगा ...
शाम होने लगी थी और सबके विदा होने की बारी भी ।धीरे धीरे सब इस बैठकी को उसके अंजाम तकपहुंचा रहे थे मगर मन मान कहां रहा था सो वहां से उठे तो सब बाहर खडे हो लिये और फ़िरचला गप्पों और फ़ोटूओं का दौर ।इस बीच पहुंचे पहुंचे हमारे मीडिया मित्र भी अपने वादेनुसार पहुंचचुके थे और अपना काम कर चुके थे

द्विवेदी जी , पाबला जी, और मैं, ..यानि अदालत, तीसरा खंबा ......तीनों रात्रि में एक ही साथ रहे ...घूमने फ़िरने खाने पीने के दौरान बहुत सा विचार विमर्श हुआ ।जाहिर है कि ब्लोग्गिंग के अलावा भीऔर न्यायिक व्ययवस्था ,महानगरीय जीवन ..आदि पर अगला दिन भाई खुशदीप जी औरइरफ़ान जी के नाम आरक्षित था ... ..

पाबला जी घर वापसी के लिए विदा हो गए.....मुझे नहीं पता कि उन्हें विदा करते समय मेरा कुछ छूटाजा रहा था कि उनका ....मगर मूक भाषा ने तय कर दिया था कि जल्दी ही एक दूसरी मुलाकात होगीआपस में ...किस किस की...कहां पर ....कब ..ये तो सब तो नियति तय कर ही देगी
वैसे भी पाबला जी ने जब जब मेरी खिंचाई की तो मैंने उन्हें हर बार यही कहा...

जो ट्रेन भिलाई से दिल्ली आती है ............वही ट्रेन दिल्ली से भिलाई भी ...........

शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

दिल्ली व्यापार मेले से थोडा दूर लगेगा ब्लोग्गर्स का स्टाल (रविवार ब्लोग बैठकी सूचना )

जी अब तो ये तय हो गया है कि इस बार दिल्ली व्यापार मेले की शुरुआत के साथ ब्लोग्गर्स का स्टाल भी लगने जा रहा है...। लेकिन नहीं नहीं जी ...ट्रेड फ़ेयर के इटपो पार्क में नहीं ..उससे अलग ..।अरे भई कहने का सीधा सीधा मतलब ये कि रविवार के लिये जिस बैठक के आयोजन की चर्चा मैंने की थी ..उसका स्थान और समय तय हो गया है ..तो आप जो भी ब्लोग्गर्स मित्र आना चाहते हैं ..इसे नोट करें और पधारने का कष्ट करें ॥ बस एक बार आप कष्ट कर लें ...इसके बाद ..थोडा बहुत कष्ट आपको बैठक के दौरान हो सकता है ....इसके बाद ......अजी इसके बाद क्या .....इसके बाद तो आपको कष्ट सहने की आदत ही हो जाएगी ..॥

अरे नहीं नहीं जी ऐसा कोई बात नहीं है ..आप तो बस स्थान और समय को नोट करें और हो सके तो मुझे मेरे इस नीचे लिखे फ़ोन नंबर पर ., या ईमेल पते पर .आने/पहुंचने की सूचना देकर निश्चिंतता प्रदान करेंगे तो कार्यक्रम ..(हालांकि...सिर्फ़ हाथ मिलाने और गले मिलने का कार्यक्रम पक्का है ) की रूपरेखा तय करने में आसानी होगी जी ..लिजिये स्थान और समय ये है ॥

दिन रविवार 15 नवंबर 2009

समय दिन के 11 बजे से शाम चार बजे तक

स्थान :-

Gg's FAST FOOD & BANQUET
Plot No. 14, Laxmi Nagar ,
District Centre ,Vikas Marg,
Delhi 110092
phone :- 424448803

किसी भी तरह की अन्य सूचना के लिये आप मुझे इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं ..9871205767 और 9910384248 तथा मेरा ई मेल .: -ajaykumarjha1973@gmail.com

मंगलवार, 10 नवंबर 2009

यार पंद्रह को दिल्ली के ब्लागर फ़्री हैं क्या ....?

.....आप कहेंगे ।कि लो ये क्या प्रश्न हुआ भई ....ब्लोग्गर हैं तो फ़्री कैसे होंगे, फ़िर ऊपर सेआप कह रहे हैं कि दिल्ली के ....अजी यहां तो रजाई बनाने वाले कारीगर भी मई जून कीगर्मी में भी फ़्री नहीं हो पाते, सडकों पर जूलूस भी निकल रहा हो किसी का दिल्ली आने जाने में ही पूरा जाम लगा देती है ॥सडकें भी फ़्री नहीं होती ..तो फ़िर काहे स्पेशली दिल्ली केब्लोग्गर्स से पूछा जी अरे नहीं यार कुछ लोग इस एंगल से भी कह सकते हैं कि ..फ़्री हैं तभिये तो ब्लोग्गर है जरा से भी व्यस्त होते ..तो वही होते जिसके लिये व्यस्त होते ... ब्लोग्गर्स थोडी होते ॥लेकिन मुद्दा ये नहीं हैजी ... ही हम कौनो ब्लोग्गर एम्प्लौयमेंट एक्स्चेंज़ का स्थापना करने वाले हैं वैसे ब्लोग्गर्स के लिये पेंशनस्कीम जरूर सोची है ....मगर हमारा व्हाट एन आईडिया बनने से पहले ही फ़्लौप हो गया ...कारण एक ही था कोईब्लोग्गर् जीते जी तो ब्लोग्गिंग से रिटायर होने से रहा ..एक बार किसी मरते हुए ब्लोगगर से उसकी आखिरी इच्छापूछी गई तो ..उसका कहना था ..

बस जी जाते जाते ये बता दिजीये कि ,...
पहेली में अबके उडन जी की जगह कौन जीता...?
हां, आजकल कौन कौन एक दूसरे के नाम से पोस्ट लिख रहा है ..?
किसी की पोस्ट पर बेनामी जी की टीप से कोई नया लफ़डा शुरू हुआ क्या...?
कौन सी वाली चिट्ठा चर्चा में हमारी पोस्ट की चर्चा हुई/नहीं हुई ....?

पूछने वाले ने कहा...भैये ..ये सारे सवाल के जवाब सुनिये के मरोगे का ....तब तो तुम्हरा मरना ..कैंसिले होगा ..

देखिये मैं फ़िर भटक गया ...छोडिये मरने मारने की बातें ....दरअसल बात ये है कि ..बहुत विश्वस्त सूत्रों से पता चला है ..कि इस सप्ताहांत कुछ ब्लोग्गर्स ..(अजी दिल्ली के फ़्री वाले नहीं )..बल्कि दूर/सुदूर वाले का पदार्पण दिल्ली मे होने वाला है । कौन कौन हैं ....कहां कहां से ..क्यों पधार रहे हैं ..दिल्ली ही क्यों पधार रहे हैं ॥..भई इसका पता तो देर सवेर आप सबको चल ही जाएगा ..लेकिन चूंकि ..इस बरस सम्मेलनों का कुल निर्धरित कोटा ..हाल ही में हुए दो बडे बडे सम्मेलनों के कारण समाप्त हो गया है ..इसलिये ये तो पक्का है कि सम्मेलन उम्मेलन तो नहिये होगा ..ओईसे भी घर वाले कहे हैं कि इस मुई ब्लोग्गिंग के लिये आपके नेट का बिल का पेमेंट हो रहा है ..यही गनीमत समझिये,....ई सम्मेलन उम्मेलन किये और करवाये त जान लिजीये कि जबरिया वोलेंट्री रिटायरमेंट करवा दिया जाएगा ॥ हां इतना जरूर है कि ..जब मिल बैठेंगे ब्लोगगर चार ..आठ..सोलह ...या पता नहीं और कितने तो .......? हां यही तो देखना है कि ...का का हो सकता है .....?भई दिल्ली वाले इस लिये कहा है कि ..दिल्ली वालों के लिये तो ये कंपल्सरी सबजेक्ट है ..बकिया लोग आस पडोस के जतने भी हैं ......फ़्री होईये न ॥

अरे टेंशन कौनो मत लिजीये जी ....न खाने का न पीने का ॥ और भी किसी बात का भी नहीं ....काहे से जब हम लोग ही टेंशन नहीं लिये तो ..आप काहे लिजीयेगा जी ...और जब टेंशन नहीं लिजीयगा न ..तो ई सब तुच्छा बातों पर ध्यान नहीं जाएगा ...तो बस पंद्रह को फ़्री रहिये ...काहे से कि हमारे साथ व्यस्त होना है आप लोगन को ...कहां ..कितने बजे..कितने बजे तक.....लिजीये आजे थोडी बता देंगे आप लोगन को ....तब तक ..थोडा इंतजार का मजा लिजीये ...। बुधवार, वीरवार का मजा लिजीये ॥

सोमवार, 9 नवंबर 2009

हमारे और्कुटिया दोस्तों की संख्या तीन सौ के पार हुई ...


जब से इस तथाकथित आभासी दुनिया से जुडा ...इसके बारे में बहुत सी अलग अलग बातें सुनी। कई तरह की मसलन यहां के रिशते नाते, दोस्ती दुश्मनी ...सब कुछ आभासी ही है । आभासी ..यानि जिसका आभास भर होता है ..मगर आभास तो मुझे अपनी मां के आशिर्वाद का भी होता है .जो अब मुझे छोड के जा चुकी हैं ॥ और यदि यही आभास है ....तो फ़िर तो ये अहसास कम से कम उस एहसास तो लाख गुना ..सुखद है ..जो एहसास मुझे अपने पुश्तैनी मकान में जाने के बाद होता है । जब देखता हूं कि ..किस तरह मेरे पिताजी को उनके अपने भाईयों ने उनका सर्वस्व लूट कर ..किनारे लगा दिया । खैर ..ये अलग मसला है ..तो मैं कह रह था कि ..इसी आभासी सफ़र के दौरान मुझे मेरे एक युवा ..रिशतेदार ने बताया कि ..और्कुट नामकी एक सोशल नेटवर्किंग साईट होती है ॥


मैं सुन कर भी बहुत ही उदासीन रहा , कारण स्पष्ट और साफ़ था ..अपने संबंधो रिश्तेदारियों में इतना अनसोशल ..मशहूर था कि ..लगा कि यहां अपने मतलब का कुछ भी नहीं है । मेरे उस युवा मित्र/रिश्तेदार ने एक नया पत्ता खोला .....आप जानते हैं ..इस सोशल साईटस के जरिये लोगों को पता नहीं कितने पुराने ..बिछडे हुए मित्र , दोस्त, और सहेलियां मिल गयी। यहां भी हमारे लिये दाल नहीं गलने वाली जैसी पोजीशन थी ..जो सहेली हमें पढते समय नहीं मिली ..वो अब क्या खाक मिलती ..और जो सहेली हमें नौकरी के साथ मिली ..वो नौकरी के साथ साथ पहले से ही हमारे घर में भी ..सहकर्मी के साथ साथ ..घरकर्मी बन चुकी थीं । अलबत्ता ..दोस्त ढूंढने मिलने वाली बात ने थोडा रोमांचित सा जरूर कर दिया । हमने उसीसे कहा ..फ़िर क्या किया जाए । उसने सलाह दी ....और्कुट पर आपकी प्रोफ़ाईल बना दें । हम डर गये ..दरअसल उन दिनों ....और्कुट पर लोगों के प्रोफ़ाईल से छेडछाड की बहुत सी घटनाएं सुनने पढने को मिल रही थीं ...मगर फ़िर खुद ही सोचा ,...अमां हमें काहे का डर जी ...हम कौन सा खान या बच्चन हैं ..कि लोग बाग हमारे नाम और काम का फ़ायदा उठा लेंगे ..। ले दे कि एक ब्लागर ठहरे ...सो जो भी सींग से सींग लडाएगा ...उहो तो ब्लागारे होगा । तो बन गया आनन फ़ानन में और्कुट प्रोफ़ाईल ..। हमने बिछडे दोस्त का सुना था ..सो पहले उसी मुहिम पर काम किया गया । मैट्रिक में जो साथी छूटा था ..पहले उसकी तलाश की कोशिश हुई ....आखिरी बार जहां उसके होने का अनुमान था ..वो सूत्र लगा के ..लगे हाथ पांव मारने ....एक लिंक मिला ..मगर चित्र नदारद ..अब क्या करें ..। उसी मार्गदर्शक ने सुझाया ...हमने उसके प्रोफ़ाईल को टटोला ....युरेका ...वही स्कूल जिससे हम पढे थे .....आगे मित्रों की सूची देखी ...उसके छोटे भाई का नाम भी मिल गया ....मगर चूंकि तस्वीर नहीं थी ..सो ..सोचा ये गया कि ..तुक्के में एक संदेश भेजा जाए...और कुछ इंतजार किया जाए...।

थोडे दिन क्या ..बस दिन के बाद ही मैसेज आ गया ...अपना वही बिछडा दोस्त निकला ..पूरे उन्नीस वर्षों के बाद ..बस कुछ ही पलों में ..फ़ोन नम्बर का आदान प्रदान...जो मित्र मेरे संपर्क में थे ....वे मेरे माध्यम से उसके संपर्क में ...और उसके दायरे में जो थे ..वे सब मेरी पहुंच में आ चुके थे ॥ सिर्फ़ चंद घंटों मे ही एक अच्छी खासी मंडली बन गई हमारी ॥..अजी ये तो एक शुरुआत भर थी ...इसके बाद तो जैसे और्कुट महाराज को पता ही चल गया कि हमें कौन कौन ..अपनी दोस्ती में चाहिये....एक के बाद एक ब्लोग्गर ..हमने कहा...अरे इहां भी ...लो जी ...मजा आ गया । इसके बाद उसी परिचित ने ..पता नहीं किस किस सोशल साईट्स पर मुझे जोड दिया ...हालांकि भूले भटके ही उधर जा पाता हूं ॥ मगर इतना तो है कि ..कम से कम मेरे लिये तो ये सोशल साईटस ..बेमानी नहीं हैं ॥आज अचानक ध्यान गया तो देखा कि अपने और्किटिया दोस्तों की संख्या तो तीन सौ के पार चली गयी है ॥ यानि भैया ....वीरेन्द्र सहवाग हो लिये हम तो ......॥ जय हो ...आज तो मन टैण टैनेन कर रहा है इस खुशी में ........आप बताईये आपका कित्ता स्कोर हुआ जी .........?

शनिवार, 7 नवंबर 2009

चिट्ठाकारी से टिप्पीकारी तक का सफ़र



दूसरों की तरह मैंने भी जब इस ब्लोग जगत में कदम रखा था तो विशुद्ध रूप से एक लेखक था ...लेखक मतलब वो वाला लेखक नहीं ...सिर्फ़ एक लिखने वाला । इससे पहले कागजों पर कलम चलती थी और अब फ़र्क ये आया था सिर्फ़ ..कि अब उंगलियां कंप्यूटर पर चल रही थी । और ज्यादा फ़र्क तो नहीं आया था अलबत्ता ये भी जरूर था कि पहले सिर्फ़ अपने मतलब की यानि अपने स्वाद के हिसाब से , अपनी जरूरत के अनुसार ही पत्र पत्रिकाओं, समाचारों का पठन और संकलन करता था । यहां आने के बाद सबसे पहले तो अपनी पोस्ट पर आई प्रति्क्रियाओं और टीपों को पढने की आदत सी हो गई थी । यानि कहने का मतलब ये कि सिर्फ़ एक चिट्ठाकार की तरह का हो गया था । चूंकि कंप्यूटर नहीं था और सिर्फ़ एक डेढ घंटे की ब्लोग्गिंग सीमा में ही सब करने की मजबूरी थी सो .....पोस्ट लिखने के बाद जो भी समय मिलता था उसमें दूसरी पोस्टें जो भी सामने पडती गयीं , एक स्वाभाविक आदत सी बनी।

किंतु इस सबके बीच एक जो चीज़ अपने आप विकसित हुई वो थी पोस्ट पर आई टिप्पणियों को पढके उनका मजा लेना और उन टीपकारों के पीछे पीछे जाकर उनको जानना , फ़िर उनके लेखन का मजा उठाना और उनको भी टीपना । मेरी आदत थी कि मैं न सिर्फ़ उनकी पोस्ट के अनुसार टिप्पणी करता था बल्कि मुझे मिली टिप्पणियों का जवाब भी दे दिया करता था । ये बस इस तरह से था जैसे मुझे मिली किसी चिट्ठी का जवाब देना । मगर फ़िर भी बहुत चाहने के बाद भी मैं ये काम बखूबी नहीं कर पाता था । इसी दौरान मुझे एक बात ने बहुत प्रभावित किया वो थी उडनतशतरी जी की टिप्पणियां, जो मुझे हर दूसरी तीसरी पोस्ट पर मिल जाती थी । जब ब्लोग्गिंग में नियमित हुआ तो जाना कि ये तो अपने ब्लोग जगत के इकलौते एलियन हैं सो कोई भी ब्लोग इनके पहुंच से बाहर नहीं है , और न ही कोई पहेली ऐसी है जिसका जवाब इन्हें न मालूम हो ।

लेकिन इससे इतर इनकी एक आदत ने मुझे भी कायल बना दिया , और मैंने भी उसी पल ये सोच लिया था कि चाहे चिट्ठाकारी चले न चले टिप्पीकारी की दुकान तो सजा ही लेंगे । और फ़िर जब नियमित हुआ , माने अपने घर में कंप्यूटर आ गया तो ये काम जोरों शोरों से शुरू हुआ । मेरी कोशिश ये होती है कि खूब सारे ब्लोग्स को पढा जाए, कौन से कैसे क्यों ....ये पैमाने मैंने कभी तय नहीं किए ..इसलिये जो मिलता है जहां मिलता है पढता हूं ...और एक ऊसूल भी पक्का है जिसके ब्लोग में एक बार घुसता हूं बिना टीपे बाहर भी नहीं निकलता । लेकिन फ़िर भी कभी कभी ..मौन टीप ...देकर सिर्फ़ पढ के ही बाहर निकलना भी पडता है ।

किसी भी पोस्ट को टीपने के दौरान मेरी कोशिश रहती है कि पोस्ट लेखक तक कम से कम दो बातें तो जरूर पहुंच जाएं। एक ये कि हमने उनकी पोस्ट को खूब अच्छे से पढ लिया है ....दूसरी बात ये कि पढने के बाद मैं आखिर समझा क्या या कि मेरे मन में क्या आया ..ये भी उन तक पहुंच जाए। यही कारण है कि मेरी टीपों में कभी आपको चुहलबाजी , कभी कविता, कभी शरारत, कभी भीरूपन , कभी सलाह , कभी शिकायत , और कभी तीखापन मिलता होगा । मगर किसी भी सूरत में मेरी यही कोशिश रहती है कि ....यदि आपको आपकी पोस्ट याद रहे तो आपको मेरी टीप भी उसी के साथ याद रहे । अब इस कोशिश में कितना कामयाब होता हूं ये तो पता नहीं मगर ...चिट्ठाकार से एक टिप्पाकार तक का ये सफ़र मुझे खूब पसंद आया । यहां ये कहता चलूं कि ..शायद यही कारण था कि जब मैंने टिप्पणियों के संकलन और चर्चा वाले ब्लोग को देखा तो झट से उनसे आग्रह किया कि मुझे भी शामिल करें और मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि मैं उस ब्लोग से जुडा ।

अब यदि टीपों की बात हो रही है तो यदि उन टीपकारों के नाम न लूं. जो मुझे प्रभावित करते हैं तो ये पोस्ट कुछ अधूरी सी लगेगी । जैसा कि पहले ही कह चुका हूं अपने एलियन जी महाराज, यानि समीर जी , का तो कोई जवाब ही नहीं है , इनके अलावा श्री गिरिजेश राव जी ,अविनाश भाई , अनिल पुसादकर जी ,समय जी , संगीता पुरी जी, अदा जी, निर्मला कपिला जी , श्री पाबला जी, द्विवेदी जी, अनूप शुक्ला जी, पांडे जी , मिश्रा जी , अरविंद मिश्रा जी भाई महेन्द्र मिश्रा जी , राज भाटिया जी, ताऊ जी , सी एम प्रसाद जी, पंडित जी , रंजन जी , शेफ़ाली पांडे जी, महफ़ूज़ अली, दीपक मशाल जी , विवेक जी , हिमांशु जी , शिवम मिश्रा जी ,पकंज मिश्रा जी , काजल कुमार जी , रूप चंद शास्त्री सी , पी सी गोदियाल जी श्री जी के अवधिया जी , भाई खुशदीप जी ,अलबेला खत्री जी ,और लास्ट बट नौट लीस्ट में अनाम जी ...इसके अलावा और भी जिनके नाम अभी नहीं ले पा रहा हूं उन सबका साथ मुझे इस टीपकारी के अनथक सफ़र में मिल रहा है ।

तो बताईये आप सब हैं न मेरे साथ ...

बुधवार, 4 नवंबर 2009

ब्लोग्गिंग के वर्तमान हालातों पर बिलागर्स (ब्लोग्गर्स नहीं ) का थौरो चिंतन.



ब्लोग्गिंग बदल रही है , ब्लोग्गर्स भी बदल रहे हैं । नहीं ब्लोग्गर्स बदल रहे हैं तभी तो ब्लोग्गिंग बदल रही है।
अरे छोडिये सीधा सीधा ..झेलिये न ..कि दोनो बदल रहे हैं । ब्लाग्गिंग सम्मेलन ( देखिये ई भी अब तो शोध का विषय बन गया है कि ऊ ठीके में ब्लाग्गिंग सम्मेलन ही था न कि सब ठो ब्लाग्गर मजे मजे में संगम डुबकी लगाने के लिये गये थे ) हो रहा है , कहिये कि जोरदार हुआ । भूगोल , विज्ञान, और इतिहास सब एके साथ बन गया जी । इसके तुरंत बाद एक ठो और सम्मेलन करा दिये अपने ताऊ जी ने.....गधा सम्मेलन । गर्दभ सम्मेलन ...कि कहें कि गजब सम्मेलन ..। ई तो नहीं पता कि ई सम्मेलन भी ऊ सम्मेलन के समांतर था कि नहीं ..मगर सुने कि सुपर हिट रहा जी ...। मुदा एक तकलीफ़ तो होईये गया ..हमारे समेत बहुते गरीब गुरबा ब्लागर को .......न तो उहे वाला में बुलाया गया न इहे में ...। इससे इतना तो फ़ायदा होईये गया कि न घर के ( बिलाग्गर सम्मेलन ) रहे न घाट (गधा सम्मेलन ) के ...ई टाईप का मुहावरा का मतबल एक दमे समझ में आ गया ..।



मुदा ई बात तो चीन द्वारा भारत का कुछ भाग दिखाने से भी जादे इंपोर्टेंट हो गया था ....सो तत्काल तय हुआ ... ...बडका ब्रिगेड एकदम इम्मिडियेट मीटिंग काल किया ...अरे एके बार नहीं जी..खेपमखेप में तो देखिये ..पढिये और चिंतन किजीये..काहे से कि बिलागर्स पर पहली बार एतना थौरो ..चिंतन हुआ है ..।तो हम भी आपको उसक रपट एकदमे नहीं ठेलेंगे .....धीरे धीरे ...और हां ई चिंतन बैठकी का कौनो तस्वीर उपलब्ध नहीं है . ..लिया हे नहीं गया जानके ..दुई ठो कारण है इसका भी ..सुना गया है कि ऐसी रपटों मे अक्सर तस्वीरें लगने से ..सारा ध्यान तस्वीरों की तरफ़ ही चला जाता है ..और रपट पिट जाती है ..दूसरा कारण ई कि ..कई बार तस्वीर देख के ..अचानक बिलागर सब को धक्का पहुंचता है....कि अरे एतना रोमांटिक गज़ल ..ठेलने वाला ई बुढऊ टाईप जवान था ...धत तेरे की..। अरे मारिये गोली इ सब टौपिक को ..पहली बैठकी में ...ताऊ जी ...अरे वही बिल्लन माने रामप्यारी वाले ...चच्चा ..टिप्पू जी ....और लाला उडनतशतरी जी शामिल हुए....। रामप्यारे से खासमखास सिफ़ारिश ..( पोल खोलिये देते हैं ..उ से कहे हैं कि ऊ का खुल्लम खेल फ़र्रुखाबादी ..मे रोजे टीपेंगे ..और कभी नहीं जीतेंगे ) पर हमको भी ई बैठकी का ..एक मात्र औडिएंस के रूप में ....नीचे चटाई पर बैठा दिया गया ..हम चुपचाप लपेटते रहे । आखिर आप सबके लिये रपट भी तो लानी थी ।





ताऊ जी :- और भैया ...का चिंतन करना है ..हमरे हिसाब से तो एजेंडा खाली ई तय होना चाहिये कि ...उडन जी और हमारे ब्लाग पर ..रिकार्ड टिप्पणी आ गयी हैं ....और आने वाले समय में हम लोग तेंदुलकर का रिकार्ड भी तोड सकते हैं ....और इस हेतु का का नया पहेली पूछा जाए....।पिक्चर बना लिये....मैगजीन भी खूबे चला....लूप में बहुते योजना सब है ....सोच रहे हैं एक ठो रिएल्टी शो भी शुरू किया जाए......एक दम फ़ाईट क्लब टाईप....लट्ठ हम देंगे ....और कपार सब तो लोग अपने उपलब्ध करा देता है ....का कहते हैं .....?








उडन जी :- देखिये हम आप दुनो ( ताऊ और चच्चा ) के बीच में सिर्फ़ इसलिये बैठ्की किये हैं ..कि भले हम सेर और सायरी ..बीडी के खोली पर लिख कर हिट करा रहे हैं ....मुदा सबको पता है कि हमरा उमर तो लडक पने से निकल के ...आप चचा , ताउ जईसने हो गया है ..और पहेली उहेली का कहें ...आप लोग पूछ पूछ के थक जाईयेगा ...हम जीत जीत के नहीं थकेंगे ....टीपवा तो ...आईये जाता है ...धडाधड ...कुछ तो विल्स कंपनी वाले भी भेज रहे हैं ...आखिर उनका विल्स कार्ड हमई तो फ़ेमस किए हैं न..।



चचा कहे :- देखिये उडन जी , ई उमर का बात ऊत नहीं किया किजीये आप ...आप ठहर एलियन ...आपका उमर का ...और आपकी जवानी का ....आप तो एवर ग्रीन जवान हैं जी । आ रहबे किजीयेगा ...ई बिलागरवा सब ..बुढैती में थोडे जाने देगा आपको ...हां आप लोगन का टीप का रिकार्ड और ऊ का स्पीड देख देख के हम सोच रहे हैं कि ..हमको तो अपने भतीजा सब के साथ ..एक दिन में आठ आठ बार टीप चर्चा लगानी पडेगा...। ओईसे भी जौन स्पीड से चर्चा मंच का विस्तार हो रहा है ..बहुत जल्दीये ई समय आने वाला है जब कौनो ब्लोगर को ई सिकायत नहीं रहेगा कि ..ऊ की पोस्ट की चर्चा नहीं हुई ....।


ताऊ :- अरे भई हमने तो अपनी इस बिल्लन को भी बराबर टरेनिंग दे दी है ....हमारा कैमरा लेकर लिकड लेती है ..का फ़ोटू खींच लाती है ...और कमाल तो ई की ...फ़ोटू एतना काट पीट के लेती है कि ...खुद हमें ही नहीं पता चलता...सो पहेली में लगा देते हैं ..ईसी बिल्लन की पहेली में .....आखिर ई बिल्लन का टेंशन अकेले हमही काहे पालें ...। कह रही थी ..ताऊ ई गर्दभ सम्मेलन का सारा फ़ोटो शूट हमें ही करने दो ...कईसे तो रोके हैं ....हम कहे ..नहीं ..हम नहीं चाहते कि ..सम्मेलन सम्मेलन का कंफ़्यूजन होई जाए..।


बस जी आज एतने ...उडन जी इसके बाद ब्रेक में बीडी पीने और ऊ का खोली पर ..का कहते हैं ..बिल्स कार्डवा लिखे चल दिये....चच्चा कहे ..रोहित को कहते हैं ..टेम्पलेटवा पकडे के मशीन का ओवरवायलिंग करदे ..आगे जरूरत पडेगा ... ताऊ तो बिजी थईये थे ...सो ब्रेक के वास्ते हम भी उठे ...और अगला चौपाल पर पहुंचे ......लिजीये सब एपीसोड आजे ....तो कल का ....


रविवार, 1 नवंबर 2009

क्या मेरी टिप्पणियां आपको कष्ट पहुंचाती हैं.....?

जी हां कोई भूमिका नहीं, कोई संदर्भ नहीं, कोई सफ़ाई नहीं, कोई आरोप भी नहीं ..और किसी से कोई शिकायत भी नहीं।

मुझे लगता था कि मैं जब भी किसी की कोई पोस्ट पढूं तो जब उस पर कुछ भी टिप्पणी करूं तो पोस्ट लिखने वाले को भी उतना नहीं तो कम से कम उससे थोडा कम ही सही आनंद आये जितन उन्हें पोस्ट लिखते समय आया हो। पता नहीं कोशिश में कितन कामयाब होता हूं..मगर विश्वास रहता है कि कम से कम ..मेरी लेखनी को पढने के बाद जो भी जैसी भी छवि मेरी उनके मन में बनी हुई है..उसको और मेरी टीप को देखते हुए..किसी भी सूरत में ..मेरी टिप्पणी किसी के लिये दुख का कारण तो नहीं बन सकती है।

मगर जाने अनजाने शायद ऐसा हो जाता है....और तब लगता है कि क्या पढना कम कर दूं ...नहीं तो फ़िर जिसे पढूं ..उस पर टीपना बंद कर दूं.....नहीं तो करूं क्या.....सोचा सीधे सीधे आपही से पूछा जाए...कि क्या वाकई मेरी टिप्पणियां ..आपको कष्ट पहुंचाती हैं...


और आपसे भी सीधे सीधे .....अपना विचार रख देने की अपेक्षा रहेगी....।

साथ चलने वाले

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